अवैध उपचार से आमजन के स्वास्थ्य पर गंभीर संकट क्षण


संवाददाता पारसनाथ दुबे 


डेहरी ऑन सोन (रोहतास)।जिले में बिना किसी मान्यता प्राप्त शैक्षणिक योग्यता, प्रशिक्षण एवं पंजीकरण के कायरोप्रैक्टिक तथा भौतिक चिकित्सा के नाम पर उपचार करने वालों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। गली-मोहल्लों, किराये के कमरों एवं अस्थायी उपचार केंद्रों में संचालित ऐसे अवैध प्रतिष्ठान आमजन के स्वास्थ्य के साथ खुलेआम खिलवाड़ कर रहे हैं।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, ये लोग सोशल मीडिया पर प्रचार, बैनर-पोस्टर तथा “बिना शल्य चिकित्सा तुरंत इलाज” जैसे भ्रामक दावों के जरिए मरीजों को गुमराह कर रहे हैं। अधिकांश मामलों में इनके पास न तो भौतिक चिकित्सा या कायरोप्रैक्टिक से संबंधित कोई मान्यता प्राप्त डिग्री होती है और न ही वैध पंजीकरण।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि रीढ़, गर्दन, नसों एवं जोड़ों से संबंधित उपचार अत्यंत संवेदनशील होते हैं। बिना वैज्ञानिक ज्ञान और चिकित्सकीय प्रशिक्षण के किया गया उपचार मरीजों के लिए गंभीर और स्थायी क्षति का कारण बन सकता है। जिले में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जहां गलत उपचार के कारण रोगियों की समस्या पहले से अधिक बढ़ गई। कुछ मामलों में नस दबने, डिस्क खिसकने, हाथ-पैर सुन्न होने तथा आंशिक पक्षाघात जैसी गंभीर शिकायतें भी देखी गई हैं।

इस संबंध में डॉ. एस. के. निषाद, स्नायु भौतिक चिकित्सा विशेषज्ञ एवं डॉ. निषाद क्लिनिक, तरबंगला, डेहरी-ऑन-सोन ने बताया कि भौतिक चिकित्सा एवं कायरोप्रैक्टिक कोई सामान्य या घरेलू उपचार नहीं है, बल्कि यह पूर्णतः वैज्ञानिक और चिकित्सा-आधारित पद्धति है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बिना मान्यता प्राप्त डिग्री एवं पंजीकरण के इस प्रकार का उपचार करना न केवल मरीजों के स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है, बल्कि यह कानूनन अपराध की श्रेणी में भी आता है।

डॉ. निषाद ने कहा कि भौतिक चिकित्सा के क्षेत्र में कार्य करने के लिए मान्यता प्राप्त संस्थान से डिग्री, संबंधित परिषद में पंजीकरण तथा चिकित्सकीय आचार-संहिता का पालन अनिवार्य है।

जानकारों का मानना है कि प्रशासनिक निगरानी की कमी और आमजन में जागरूकता के अभाव के कारण जिले में फर्जी कायरोप्रैक्टिक एवं भौतिक चिकित्सा करने वालों का जाल तेजी से फैलता जा रहा है। इस स्थिति को देखते हुए जागरूक नागरिकों एवं स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से अवैध उपचार केंद्रों की पहचान कर सघन जांच कराने तथा दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने आम जनता से अपील की है कि किसी भी प्रकार का उपचार कराने से पहले यह सुनिश्चित करें कि उपचार करने वाला व्यक्ति योग्य, प्रशिक्षित एवं पंजीकृत हो। साथ ही झूठे दावों और सस्ते इलाज के लालच में आकर अपने स्वास्थ्य के साथ किसी भी प्रकार का समझौता न करें।

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