पालिका की मेहरबानी, कुत्ते बने पहलवान !
- महेंद्र कुमार (गुडडू), ब्यूरो चीफ भिवंडी
- Feb 04, 2026
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भिवंडी में 6 साल में 67 हजार लोग डॉग बाइट का शिकार, नसबंदी-टीकाकरण फेल
भिवंडी। भिवंडी में आवारा स्वानों का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। हाल ही में 12 वर्षीय बच्चे की स्वान के काटने से हुई मौत ने एक बार फिर नगर पालिका के स्वच्छता और आरोग्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालात यह हैं कि बीते लगभग छह वर्षों में भिवंडी शहर में 67,183 लोग स्वान बाइट का शिकार हो चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद मनपा प्रशासन की कार्रवाई बेहद सुस्त नजर आ रही है।
आंकड़ों पर नजर डालें तो स्थिति और भी डरावनी है। सिर्फ जनवरी 2026 में ही 1062 लोगों को कुत्तों ने काटा है। वहीं, पिछले एक वर्ष में 11,037 लोग स्वान हमले में घायल हुए। शहर में अनुमानित 14 हजार से अधिक आवारा स्वान सड़कों और गलियों में झुंड बनाकर घूम रहे हैं, जिससे राहगीरों, स्कूली बच्चों और दोपहिया वाहन चालकों की जान हमेशा खतरे में रहती है। कई मामलों में डर के कारण वाहन चालक दुर्घटनाग्रस्त भी हो चुके हैं।
मनपा द्वारा आवारा स्वानों की नसबंदी और रेबीज टीकाकरण का ठेका हैदराबाद की “वेट्स सोसाइटी फॉर एनिमल वेलफेयर एंड रूरल डेवलपमेंट” को पांच वर्षों के लिए दिया गया है। लक्ष्य 13,500 स्ट्रीट डॉग्स की नसबंदी का था, लेकिन जनवरी 2026 तक 15 माह में सिर्फ 6134 स्वानों की ही नसबंदी हो सकी है। यानी रोजाना औसतन मात्र 13 स्वानों की नसबंदी। यही नहीं, टीकाकरण की रफ्तार भी बेहद धीमी है, जिससे स्वानों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। ईदगाह, शांतिनगर, कामतघर, नागांव, गायत्रीनगर, निजामपुर और कोंबडपाड़ा जैसे इलाकों में हालात सबसे ज्यादा खराब हैं। नागरिकों का आरोप है कि स्वान पकड़ने वाले ठेकेदार के कर्मचारी कभी-कभार ही नजर आते हैं। नसबंदी के बाद पहचान के लिए कान पर लगाया जाने वाला निशान भी इतना छोटा होता है कि यह पता लगाना मुश्किल हो जाता है कि कौन सा स्वान नसबंद है और कौन नहीं। स्वान बाइट के इलाज को लेकर भी भ्रम और नाराजगी है। हालांकि आईजीएम उपजिला अस्पताल की अधीक्षक डॉ. माधवी पंधारे का कहना है कि रैबीज इंजेक्शन उपलब्ध रहते हैं, लेकिन कभी-कभी मरीजों की संख्या अधिक होने से अस्थायी कमी हो जाती है। मनपा के मुख्य स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. संदीप गाडेकर ने स्पष्ट किया कि आईजीएम और बीजीपी अस्पताल में एंटी-रेबीज वैक्सीन पर्याप्त है और अप्रैल 2025 से जनवरी 2026 तक हजारों मरीजों का इलाज किया गया है। बहरहाल, बढ़ते हमलों और मौतों ने जनता में गुस्सा भर दिया है। सामाजिक संगठनों और नागरिकों ने मनपा से नसबंदी व टीकाकरण अभियान को युद्धस्तर पर चलाने की मांग की है, ताकि भिवंडी को इस “डॉग टेरर” से निजात मिल सके।


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