पाइप लाइन बार-बार टूट रही, शहर प्यासा…
- महेंद्र कुमार (गुडडू), ब्यूरो चीफ भिवंडी
- Feb 04, 2026
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भिवंडी जलापूर्ति की कमान ‘प्रभारी राज’ में, संदीप पटनावर पर उठे गंभीर सवाल
भिवंडी। भिवंडी शहर की जलापूर्ति व्यवस्था पूरी तरह भगवान भरोसे चल रही है। कभी सड़क खुदाई, कभी घटिया मरम्मत और कभी प्रशासनिक लापरवाही—नतीजा यह कि शहर बार-बार पानी की घोर किल्लत झेलने को मजबूर है। ताजा मामला गौतम कंपाउंड का है, जहां सड़क निर्माण के दौरान मुंबई मनपा की 600 एमएम की मुख्य पाइप लाइन एक बार फिर फूट गई। हजारों लीटर पानी यूं ही सड़कों पर बह गया और शहर के कई इलाकों में सप्लाई ठप हो गई।
मनपा जलापूर्ति विभाग के कार्यकारी अभियंता संदीप पटनावर भले ही इसे “तत्काल दुरुस्ती” बताकर अपनी पीठ थपथपा रहे हों, लेकिन हकीकत यह है कि ऐसी घटनाएं अब आम हो चुकी हैं। सवाल यह है कि आखिर एक ही तरह की लापरवाही बार-बार क्यों हो रही है? क्या पाइप लाइन की सुरक्षा और समन्वय की जिम्मेदारी केवल कागजों तक सीमित है।
सूत्रों के मुताबिक भिवंडी मनपा के वाटर सप्लाई विभाग में इंजिनियरों के कुल 10 पद वर्षों से खाली पड़े हैं। हालात इतने बदतर हैं कि प्रभारी कार्यकारी अभियंता और प्रभारी कनिष्ठ इंजिनियरों के सहारे विभाग चलाया जा रहा है। चौंकाने वाली बात यह है कि बांधकाम विभाग के इंजिनियर सरफराज अंसारी को एक नहीं चार प्रभाग ( 1,3,4,5) को जलापूर्ति विभाग का जिम्मा सौंप दिया गया है, और किरण गावडे को प्रभाग 2 की जवाबदेही सौपा गया है। जबकि कुछ मामलों में सफाई कर्मियों और क्लर्क दर्जे के कर्मचारियों को भी “प्रभारी कनिष्ठ अभियंता” बना दिया गया है।इतना ही नहीं, इन प्रभारी अभियंताओं को किसी भी महत्वपूर्ण फाइल पर हस्ताक्षर करने से सख्त मनाही है। यानी जिम्मेदारी उनके कंधों पर, लेकिन अधिकार शून्य। ऐसे में न तो स्थायी निर्णय लिए जा रहे हैं और न ही दीर्घकालीन समाधान पर काम हो पा रहा है। इसका सीधा खामियाजा शहर की जनता भुगत रही है। गौतम कंपाउंड की घटना में मनपा के 12 कर्मचारियों ने 12 घंटे मेहनत कर पाइप लाइन दुरुस्त कर दी और 15 घंटे बंद रहने वाली पानी सप्लाई 13 घंटे में बहाल कर दी गई। लेकिन सवाल यह नहीं कि मरम्मत कितनी जल्दी हुई, सवाल यह है कि पाइप लाइन बार-बार टूट ही क्यों रही है। शहरवासियों का आरोप है कि जब तक जलापूर्ति विभाग में स्थायी इंजिनियरों की नियुक्ति नहीं होती और कार्यकारी अभियंता संदीप पटनावर की कार्यशैली की उच्चस्तरीय जांच नहीं होती, तब तक भिवंडी को पानी संकट से राहत मिलना मुश्किल है। बार-बार फूटती पाइप लाइनें अब “दुर्घटना” नहीं, बल्कि सिस्टम फेलियर की खुली निशानी बन चुकी हैं।


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