इजराइल-ईरान युद्ध का असर: शहर की सड़कों से गायब हुआ स्ट्रीट फूड, गैस-कोयले के दाम आसमान पर

भिवंडी। इजराइल और ईरान के बीच जारी युद्ध का असर अब स्थानीय स्तर पर भी दिखाई देने लगा है। शहर की सड़कों पर मिलने वाला आम आदमी का पसंदीदा स्ट्रीट फूड—वड़ा पाव, चाइनीज, डोसा और राजवाड़ी चाय—तेजी से गायब होता जा रहा है। हालात यह हैं कि जहां पहले हर गली-नुक्कड़ पर खाने-पीने के स्टॉल नजर आते थे, वहीं अब कई स्थानों पर ये पूरी तरह से बंद हो चुके हैं।

ईंधन संकट से ठप हुए ठेले-स्टॉल‌.....

स्ट्रीट फूड विक्रेताओं के सामने सबसे बड़ी समस्या ईंधन की हो गई है। गैस सिलेंडर, कोयला और राकेल (केरोसिन) की भारी कमी के चलते उनका कामकाज प्रभावित हुआ है। जो सिलेंडर पहले आसानी से उपलब्ध हो जाते थे, अब वे मिलना मुश्किल हो गया है। वहीं, कोयले और राकेल के दाम भी अचानक बढ़ गए हैं।

स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 600 रुपये में मिलने वाली अंगीठी अब 6000 रुपये तक पहुंच गई है। इसके अलावा, स्टोव (स्टोप) की उपलब्धता भी काफी कम हो गई है, जिससे छोटे विक्रेताओं के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।

महंगाई की मार: चाय और वड़ा पाव के दाम बढ़े.......

ईंधन संकट का सीधा असर आम लोगों की जेब पर भी पड़ रहा है। होटल और छोटे खानपान केंद्रों ने अपने दाम बढ़ा दिए हैं। जहां पहले चाय 7-8 रुपये में मिल जाती थी, अब वही चाय 10 रुपये में बिक रही है। इसी तरह वड़ा पाव की कीमत भी बढ़कर 15 रुपये तक पहुंच गई है।

राजवाड़ी चाय के स्टॉल पूरी तरह बंद....

राजस्थान से आने वाले राजवाड़ी चाय विक्रेताओं पर इस संकट का सबसे ज्यादा असर पड़ा है। ईंधन और सप्लाई की समस्या के चलते उनके स्टॉल पूरी तरह से बंद हो गए हैं। इससे न केवल कारोबारियों को नुकसान हो रहा है, बल्कि स्थानीय लोगों को भी उनके पसंदीदा स्वाद से वंचित होना पड़ रहा है।

विक्रेताओं में चिंता, प्रशासन से मांग....

स्ट्रीट फूड विक्रेताओं का कहना है कि यदि जल्द ही स्थिति में सुधार नहीं हुआ, तो उनका व्यवसाय पूरी तरह ठप हो सकता है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि गैस, कोयला और अन्य ईंधन की आपूर्ति सुचारू की जाए और बढ़ती कीमतों पर नियंत्रण लगाया जाए।

एक ओर जहां लोगों को रोजमर्रा की चीजें महंगी मिल रही हैं, वहीं दूसरी ओर उनके पसंदीदा स्ट्रीट फूड का भी अभाव हो गया है। ऐसे में इजराइल-ईरान युद्ध का असर अब आम नागरिकों के जीवन पर साफ तौर पर दिखाई देने लगा  है।

रिपोर्टर

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