भिवंडी में ‘जहरीली हवा’ का खेल !

बिना तकनीकी अधिकारी के चल रहा पर्यावरण विभाग।

स्क्रैप जलाने वालों पर कार्रवाई शून्य


भिवंडी। भिवंडी में प्रदूषण ने अब खतरनाक रूप ले लिया है। शहर के कई इलाकों में अवैध रूप से चल रहे साइजिंग और डाइंग यूनिटों में खुलेआम प्लास्टिक, रबर और कचरा जलाया जा रहा है, जिससे हवा जहरीली होती जा रही है। हैरानी की बात यह है कि इस गंभीर स्थिति के बावजूद महानगरपालिका का पर्यावरण विभाग बिना तकनीकी अधिकारी के ही चल रहा है और कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति हो रही है।

जानकारी के मुताबिक, साइजिंग यूनिटों में ब्रॉयलर के जरिए स्क्रैप जलाकर भाप तैयार की जा रही है। इसमें रबर, प्लास्टिक, लकड़ी और अन्य कचरे का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे निकलने वाला काला धुआं पूरे शहर में फैल रहा है। नतीजतन लोगों में सांस और फेफड़ों से जुड़ी बीमारियां तेजी से बढ़ रही है। शहर के नबी बस्ती, गौतम कंपाउंड, खोखा कंपाउंड, सोनाले, गोविंद कंपाउंड समेत कई इलाकों में यही हाल है। स्कूल नंबर 65 के पास खुले मैदान में भी केमिकल युक्त स्क्रैप जलाने की शिकायतें सामने आई हैं। इसके बावजूद पालिका की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। सूत्रों के अनुसार, भिवंडी पालिका के पर्यावरण विभाग में कई वर्षों से कोई तकनीकी अधिकारी नियुक्त ही नहीं है। विभाग का पूरा काम क्लर्क स्तर के कर्मचारियों के भरोसे चलाया जा रहा है। इससे प्रदूषण नियंत्रण की पूरी व्यवस्था सवालों के घेरे में है। और तो और, शहर में प्रदूषण मापने के लिए लगाए गए उपकरण भी वर्षों से बंद पड़े हैं। आईजीएम अस्पताल के सामने फायर ब्रिगेड इमारत, संपदा नाइक हॉल और कामतघर स्थित मंगल भवन की छत पर लगे मॉनिटरिंग सिस्टम निष्क्रिय हैं। ऐसे में शहर की हवा में प्रदूषण का स्तर क्या है, इसकी सही जानकारी तक उपलब्ध नहीं हो पा रही।

सूत्रों का दावा है कि डाइंग और साइजिंग यूनिटों को हर साल एनओसी देने के नाम पर भारी रकम ली जाती है। महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल के 2023 के आंकड़ों के अनुसार, भिवंडी क्षेत्र में 253 डाइंग-साइजिंग यूनिट संचालित हैं। इसके बावजूद इन पर प्रभावी निगरानी का अभाव साफ नजर आ रहा है। हाल ही में पालिका का पर्यावरण विभाग ने कुछ यूनिटों का निरीक्षण किया, लेकिन आरोप है कि कार्रवाई के बजाय मोटी रकम लेकर फाइलें बंद कर दी गईं। बाबला कंपाउंड और धामणकर नाका क्षेत्र में जांच के बाद भी कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। शहर में बढ़ते प्रदूषण और प्रशासन की निष्क्रियता ने अब बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है—क्या भिवंडी के लोगों को इसी जहरीली हवा में जीने के लिए मजबूर रहना पड़ेगा, या फिर जिम्मेदार अधिकारी इस पर कोई सख्त कदम उठाएंगे ?

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