डंपिंग ग्राउंड में दफन 64 लाख का गुटखा फिर निकाला, माफियाओं का दुस्साहस—प्रशासन पर उठे सवाल

भिवंडी। भिवंडी में गुटखा माफियाओं की हैरान कर देने वाली करतूत ने प्रशासन और पुलिस व्यवस्था की गंभीर खामियों को उजागर कर दिया है। अवैध कारोबार पर लगाम लगाने के लिए जब्त कर जमीन में दफन किया गया करीब 64 लाख रुपये का गुटखा कुछ ही घंटों में दोबारा खोदकर निकाल लिया गया। इस घटना से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है।

जानकारी के अनुसार, भिवंडी क्राइम ब्रांच ने हाल ही में ग्रामीण क्षेत्र में कार्रवाई करते हुए भारी मात्रा में गुटखा जब्त किया था। न्यायालय की अनुमति मिलने के बाद अन्न एवं औषध प्रशासन के अधिकारियों की मौजूदगी में इस गुटखे को चाविंद्रा डंपिंग ग्राउंड में 20 से 25 फीट गहरे गड्ढे में दफनाया गया। लेकिन डंपिंग की प्रक्रिया पूरी होते ही गुटखा माफिया सक्रिय हो गए। जेसीबी मशीन की मदद से उन्होंने उसी स्थान को दोबारा खोदा और बड़ी मात्रा में गुटखा बाहर निकाल लिया। इतना ही नहीं, गुटखा टेम्पो में भरकर ले जाने की कोशिश भी की गई, जिसमें वे आंशिक रूप से सफल भी रहे। घटना की भनक लगते ही स्थानीय नागरिक मौके पर पहुंचे और माफियाओं को रोकने का प्रयास किया। इसी दौरान कुछ स्वयंभू यूट्यूबर और कथित पत्रकार भी वहां पहुंचे, जिन पर माफियाओं का साथ देने का आरोप है। गुस्साए लोगों ने ऐसे लोगों की जमकर पिटाई कर दी, जिसके बाद वे किसी तरह जान बचाकर मौके से फरार हो गए।

सूचना मिलते ही पुलिस के पहुंचने की खबर लगते ही आरोपी गुटखा से भरा टेम्पो छोड़कर फरार हो गए। इस पूरे घटनाक्रम के चलते डंपिंग ग्राउंड क्षेत्र में कुछ समय के लिए तनाव का माहौल बना रहा। स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों का आरोप है कि बिना अंदरूनी मिलीभगत के इस तरह डंप किए गए गुटखे को दोबारा निकालना संभव नहीं है। न्यायालय के निर्देशों के अनुसार गुटखे को पूरी तरह नष्ट होने तक निगरानी में रखना जरूरी था, लेकिन इस घटना ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। माजी नगरसेवक विकास निकम ने इस मामले में सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि यह केवल माफियाओं की हिम्मत नहीं, बल्कि सिस्टम की लापरवाही और संभावित मिलीभगत का भी संकेत है। राज्य में गुटखा बंदी के बावजूद इस तरह की घटनाएं प्रशासन की कार्यप्रणाली पर बड़ा प्रश्नचिन्ह खड़ा कर रही हैं। अब देखना होगा कि जिम्मेदारों पर क्या कार्रवाई होती है और क्या गुटखा माफियाओं के इस नेटवर्क पर वास्तव में लगाम लग पाती है या नहीं।

रिपोर्टर

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