कचरे में ‘सोना’ नहीं, करोड़ों का खेल —चविंद्रा डंपिंग ग्राउंड बना भ्रष्टाचार और माफियाओं का गढ़

भिवंडी। भिवंडी का चविंद्रा डंपिंग ग्राउंड इन दिनों कचरा निपटान का स्थल कम और कथित भ्रष्टाचार व अवैध कारोबार का केंद्र ज्यादा बनता जा रहा है। यहां कचरे के “बायोमाइनिंग” के नाम पर करोड़ों रुपये के घोटाले और प्रतिबंधित गुटखे के काले खेल ने प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कहावत है कि “कचरे में भी सोना निकलता है”, लेकिन भिवंडी में यह कहावत अब भ्रष्टाचार की कहानी बन चुकी है। एक तरफ सूखे कचरे के बायोमाइनिंग के नाम पर सरकारी खजाने को चूना लगाया जा रहा है, तो दूसरी ओर यही डंपिंग ग्राउंड गुटखा माफियाओं के लिए ‘रिकवरी सेंटर’ बन गया है।

हाल ही में 10 अप्रैल को कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने करीब 64 लाख रुपये का प्रतिबंधित गुटखा यहां डंप किया था। लेकिन उसी रात माफियाओं ने जेसीबी मशीन से गड्ढा खोदकर गुटखा बाहर निकाल लिया और टेम्पो में भरकर ले जाने की तैयारी करने लगे। स्थानीय लोगों की सतर्कता से मामला सामने आया, जिसके बाद पुलिस पहुंची तो आरोपी वाहन छोड़कर फरार हो गये। इस भष्ट्राचार के खेल में पालिका का आरोग्य व स्वच्छता विभाग के अधिकारी भी शामिल होने की‌ प्रबल आशंका है। जिसकी जांच होनी चाहिए।

सूत्रों के मुताबिक, यह कोई पहली घटना नहीं है। आरोप है कि डंप किए गए गुटखे को बार-बार निकालकर बाजार में बेचा जाता है, जिससे लाखों-करोड़ों का अवैध कारोबार फल-फूल रहा है। वहीं, कचरा बायोमाइनिंग परियोजना भी सवालों के घेरे में है। पालिका ने सुप्रिमो गोल्ड इरिगेशन लिमिटेड को करोड़ों रुपये का ठेका दिया है, जिसमें 70% भुगतान राज्य सरकार और 30% मनपा द्वारा किया जा रहा है। नियमों के अनुसार गीले-सूखे कचरे को अलग कर खाद और उपयोगी सामग्री तैयार की जानी थी, लेकिन हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है।

 जानकारी के अनुसार, ठेकेदार नए कचरे की बजाय वर्षों पुराने कचरे को खोदकर निकाल रहा है, जो अब पूरी तरह मिट्टी बन चुका है। इस “मिट्टी” को बाजार में ऊंचे दामों पर बेचकर मुनाफा कमाया जा रहा है, जबकि बायोमाइनिंग के नाम पर सरकारी धन भी वसूला जा रहा है। आरोप है कि फर्जी बिलों के जरिए हर महीने करोड़ों का घोटाला किया जा रहा है। पूर्व नगरसेवक मतलूब सरकार ने इस पूरे मामले पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि, “डंपिंग ग्राउंड का कचरा अब मिट्टी बन चुका है, जिसे बेचकर ठेकेदार करोड़ों कमा रहा है और प्रशासन चुप्पी साधे बैठा है।” इस पूरे खेल का खामियाजा स्थानीय नागरिकों को भुगतना पड़ रहा है। डंपिंग ग्राउंड में लगातार हो रही खुदाई और मशीनों से उड़ती धूल ने पूरे इलाके को प्रदूषित कर दिया है। लोगों को सांस लेने में दिक्कत हो रही है और बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। बदबू और गंदगी से आसपास रहना मुश्किल हो गया है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि यदि जल्द ही इस पर कार्रवाई नहीं हुई, तो यह क्षेत्र गंभीर स्वास्थ्य संकट का सामना कर सकता है। हैरानी की बात यह है कि मनपा में प्रशासक अनमोल सागर ( भा.प्र.से.) और दो अतिरिक्त आयुक्तों की मौजूदगी के बावजूद यह कथित घोटाला खुलेआम जारी है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या प्रशासन को इस पूरे खेल की जानकारी नहीं, या फिर सब कुछ “आशीर्वाद” से चल रहा है।

रिपोर्टर

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