डंपिंग ग्राउंड में दफन गुटखा का ‘जिन्न’ महासभा में निकला,नहीं हुई FIR

भिवंडी। भिवंडी-निजामपुर शहर महानगर पालिका के डंपिंग ग्राउंड में दफन किए गए प्रतिबंधित गुटखा का मामला अब सियासी तूल पकड़ता जा रहा है। करीब 63 लाख रुपये के गुटखे से जुड़ा यह मामला बुधवार को महासभा में गूंजा, जहां जनप्रतिनिधियों ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए। महासभा के दौरान यह मुद्दा उठते ही पालिका अधिकारियों में हड़कंप मच गया। अधिकारियों ने आनन-फानन में जांच और कार्रवाई का आश्वासन देकर मामला शांत करने की कोशिश की। उपायुक्त (आरोग्य) विक्रम दराडे उस समय घिर गए जब एक नगरसेवक ने उनसे तीखा सवाल पूछा। नगरसेवक ने जानना चाहा कि डंपिंग ग्राउंड में दफन गुटखा निकालने के लिए इस्तेमाल की गई जेसीबी मशीन किसकी थी और वह रात के समय वहां कैसे पहुंची।

दरअसल, 10 अप्रैल को भिवंडी क्राइम ब्रांच और खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) की संयुक्त टीम ने कोर्ट के आदेश पर सोनाले गांव से जब्त किए गए करीब 63 लाख रुपये के प्रतिबंधित गुटखे को डंपिंग ग्राउंड में नष्ट करने के लिए दबाया था। आरोप है कि उसी रात गुटखा माफिया ने दफन किए गए गुटखे को दोबारा निकालने की कोशिश की। इस दौरान स्थानीय निवासियों ने इसका विरोध किया, जिसके चलते दो गुटों के बीच जमकर मारपीट भी हुई। सूत्रों के मुताबिक, दोनों ही गुट गुटखे को अपने कब्जे में लेने की फिराक में थे। ड्रपिंग के समय डंपिंग ग्राउंड पर मनपा के आरोग्य और स्वच्छता विभाग के अधिकारी पुलिस कर्मियों के साथ मौजूद थे। इसी को लेकर संदेह गहरा गया है कि गुटखा माफिया को इसकी जानकारी अंदर से ही दी गई हो सकती है। जनप्रतिनिधियों ने इस पूरे मामले में पालिका अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच की मांग की है। महासभा में इस मुद्दे पर तीखी बहस के बीच उपायुक्त विक्रम दराडे ने सफाई देते हुए कहा कि मामले में कार्रवाई के लिए तालुका पुलिस चौकी को पत्र भेजा गया है और दोषियों के खिलाफ गुनाह दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। अब यह देखना अहम होगा कि इस संवेदनशील मामले में जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है और क्या वाकई गुटखा माफिया और अधिकारियों की मिलीभगत के आरोपों का सच सामने आ पाता है या नही।

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