तीन महीने बाद भी ‘गट नेताओं’ को नहीं मिला ठिकाना

महापौर का 2 दिन का वादा भी निकला हवा !

भिवंडी। भिवंडी-निजामपुर शहर महानगरपालिका में चुनाव परिणाम आए तीन महीने बीत चुके हैं, लेकिन अब तक विभिन्न राजनीतिक दलों के गट नेताओं को बैठने और कामकाज के लिए कार्यालय उपलब्ध नहीं कराया गया है। महापौर द्वारा महासभा में दो दिन के भीतर कार्यालय देने का आश्वासन भी अब तक अधूरा ही है, जिससे नगरसेवकों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।

भिवंडी मनपा का चुनाव 15 जनवरी 2026 को संपन्न हुआ था, जबकि 16 जनवरी को परिणाम घोषित किए गए। इसके बाद 20 फरवरी 2026 को सेक्रुलर फंड के नारायण चौधरी ने महापौर पद और कांग्रेस के तारिक अब्दुल बारी मोमिन ने उपमहापौर पद की शपथ ली। कोंकण भवन में विभिन्न दलों—कांग्रेस, भाजपा, शिवसेना, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट), समाजवादी पार्टी, कोणार्क विकास आघाड़ी और भिवंडी विकास मंच के गट नेताओं की सूची भी जमा की जा चुकी है। नियमों के अनुसार, इन गट नेताओं को मनपा मुख्यालय में कार्यालय उपलब्ध कराना प्रशासन और आयुक्त की जिम्मेदारी होती है। बावजूद इसके, चुनाव परिणाम के तीन महीने बाद भी यह प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है।

चुनाव परिणामों पर नजर डालें तो कांग्रेस को 30 सीटें, भाजपा को 22, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) और शिवसेना (शिंदे गुट) को 12-12 सीटें, समाजवादी पार्टी को 6, कोणार्क विकास आघाड़ी को 4, भिवंडी विकास मंच को 3 और एक निर्दलीय उम्मीदवार को जीत मिली थी। इस मुद्दे को लेकर भिवंडी मनपा की चौथी विशेष महासभा में भी जोरदार चर्चा हुई थी। समाजवादी पार्टी के गट नेता ने कार्यालय में ताला बंद होने का मुद्दा उठाकर इसे प्रमुखता से सामने रखा। इसके बाद महापौर नारायण चौधरी ने सभी गट नेताओं को दो दिन के भीतर कार्यालय उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया था। वहीं, पालिका आयुक्त अनमोल सागर ने भी कार्यालयों के नवीनीकरण का हवाला दिया था। हालांकि, महासभा के बाद लगभग एक सप्ताह बीत जाने के बावजूद गट नेताओं को कार्यालय नहीं मिल सका है। नतीजतन, नगरसेवकों को अपने कार्यों के लिए इधर-उधर भटकना पड़ रहा है, जिससे प्रशासनिक कामकाज भी प्रभावित हो रहा है। स्थानीय राजनीतिक हलकों में अब यह सवाल उठने लगा है कि आखिर कब तक गट नेताओं को उनका अधिकारिक कार्यालय मिलेगा और प्रशासन इस दिशा में ठोस कदम कब उठाएगा।

रिपोर्टर

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