ओपीडी बंद रहने से मरीज हुए परेशान, डॉक्टरों ने सुरक्षा की मांग को लेकर किया कार्य बहिष्कार

आपातकालीन सेवा रही चालू, रेबीज इंजेक्शन व महिला मरीजों को भी लौटना पड़ा

संवाददाता रूपेश कुमार दुबे की रिपोर्ट 

कैमूर----- जिले के कुदरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में बुधवार, 22 जुलाई को बिहार स्वास्थ्य सेवा संघ भासा के आह्वान पर चिकित्सकों ने ओपीडी सेवा का बहिष्कार किया सुबह 10 बजे से ओपीडी पूरी तरह बंद रहने के कारण दूर-दराज से इलाज कराने पहुंचे मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। हालांकि अस्पताल में आपातकालीन (इमरजेंसी) सेवाएं पूर्ववत संचालित होती रहीं और गंभीर मरीजों का उपचार जारी रहा।

ओपीडी बंद होने की जानकारी नहीं होने के कारण बड़ी संख्या में मरीज अस्पताल पहुंचे, लेकिन पर्ची नहीं कटने से उन्हें बिना इलाज कराए वापस लौटना पड़ा। इससे अस्पताल परिसर में मरीजों और उनके परिजनों में निराशा और असंतोष का माहौल देखने को मिला।

मेवाड़ा गांव निवासी सुभाष शर्मा ने बताया कि उन्हें कुत्ते के काटने के बाद रेबीज का इंजेक्शन लगवाना था। वह समय पर अस्पताल पहुंचे, लेकिन ओपीडी पर्ची नहीं कटने के कारण उन्हें इंजेक्शन नहीं लगाया गया। अस्पताल कर्मियों ने बताया कि आज डॉक्टरों की हड़ताल के कारण ओपीडी सेवा बंद है।

वहीं, मोकरम गांव की रविता देवी ने बताया कि वह स्त्री रोग विशेषज्ञ से परामर्श लेने आई थीं, लेकिन ओपीडी बंद रहने से उनका पर्चा नहीं बन सका और उन्हें बिना इलाज लौटना पड़ा।

इमरजेंसी सेवा में तैनात डॉ. पूजा कुमारी ने बताया कि बिहार स्वास्थ्य सेवा संघ (भासा) के आह्वान पर डॉक्टरों ने केवल ओपीडी सेवा का बहिष्कार किया है, जबकि आपातकालीन सेवाएं जारी रखी गई हैं ताकि गंभीर मरीजों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

उन्होंने कहा कि हाल के दिनों में राज्य के विभिन्न हिस्सों में डॉक्टरों के साथ मारपीट की घटनाएं लगातार बढ़ी हैं। कुछ दिन पहले अरवल के सिविल सर्जन के साथ हुई मारपीट की घटना ने चिकित्सकों में असुरक्षा की भावना पैदा कर दी है। उन्होंने कहा कि डॉक्टर लगातार मरीजों की सेवा करते हैं, लेकिन उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। इसी मांग को लेकर एक दिवसीय ओपीडी बहिष्कार किया गया है।

डॉक्टरों का कहना है कि जब तक चिकित्सकों की सुरक्षा के लिए प्रभावी कानून और सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित नहीं की जाती, तब तक इस तरह के विरोध कार्यक्रम जारी रह सकते हैं। वहीं मरीजों ने सरकार से मांग की कि डॉक्टरों की समस्याओं का जल्द समाधान किया जाए ताकि आम लोगों की स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित न हों।

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