
कचरा ढुलाई करने वाले पूर्व ठेकेदार R&B कंपनी से डरे पालिका आयुक्त अजय वैध
- महेंद्र कुमार (गुडडू), ब्यूरो चीफ भिवंडी
- May 13, 2024
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◾ठेकेदार ने 50 घंटा गाडियां व 23 बड़े कचरा संकलन वाले RC गाडियों पर किया कब्जा
◾कुछ गाडियों की बिक्री, तो कुछ नंबर प्लेट बदल कर कल्याण महानगर पालिका चला रहा है ठेकेदार
◾ पालिका से एक रूपये प्रतिमाह भाड़े में लिया था 50 घंटा गाडियां व 23 बड़े कचरा RC वाहन
भिवंडी। भिवंडी निज़ामपुर शहर महानगर पालिका में प्रशासक राज के बाद जहां पर भष्ट्राचार अपने चरम स्तर पर है। वही पर दररोज नये नये कारनामे उजागर होते रहे है। वर्तमान प्रशासक अजय वैध प्रशासन चलाने में पूरी तरह से असमर्थ साबित हुए है। शहर में कचरा ढुलाई करने वाले ठेकेदार आर एंड बी इन्फ्रा कंपनी का ठेका रद्द कर उसके स्थान पर टेंडर निकालकर यह ठेका दुसरे कंपनी को दे दिया है। किन्तु प्रशासन द्वारा आर एंड बी इन्फ्रा कंपनी को एक रूपये प्रतिमाह भाड़े पर दिये लगभग 10 करोड़ रूपये कीमत के 50 घंटा गाडियां व 23 बड़े कचरा संकलन वाले वाहन RC वाहन वापस लेने में नाकाम साबित हुए है। सुत्रों की माने पालिका स्वामित्व वाले गाडियां वापस ना मिलने पर प्रशासन ने कई गाडियां भाड़े पर लेकर कचरा की ढुलाई करवा रही है। जिसके कारण पालिका प्रशासन को लाखों रूपये किराये के रूप में भुगतान करना पड़ता है। वही पर पूर्व ठेकेदार आर एंड बी इन्फ्रा कंपनी ने पालिका के स्वामित्व वाले कुछ वाहनों की बिक्री कर दिया है और कुछ वाहन को नंबर प्लेट बदलकर कल्याण महानगर पालिका में चलवा रहा है।
गौरतलब हो कि स्वच्छ भारत अभियान मिशन 2017-2018 में केन्द्र सरकार ने भिवंडी निज़ामपुर शहर महानगर पालिका को स्वच्छता के मामले में तत्कालीन आयुक्त योगेश म्हसे और महापौर जावेद दलवी को दिल्ली बुला कर विशेष पुरस्कार दिया था और 25 लाख की निधि भी दी थी। इस निधि से स्वच्छता के लिए मशीनी व सामग्री खरीदा गया था। पालिका प्रशासन ने 10 करोड़ रूप खर्च कर 59 घंटा गाडियां व 23 बड़े कचरा संकलन RC बडे वाहन खरीदे थे। उक्त सभी गाडियां वर्ष 2022 में कचरा ढुलाई का ठेका लेने वाली कंपनी आर एंड बी इन्फ्रा कंपनी को एक रूपये प्रतिमाह भाड़े पर दे दिया गया था। किन्तु ठेकेदार की कार्यप्रणाली सही ना होने के कारण आयुक्त अजय वैध ने कंपनी को नोटिस भेजकर 15 मार्च 2024 को ठेका रद्द कर दिया है और उनके स्थान पर नये ठेकेदार को ठेका दिया गया है। किन्तु लगभग दो महिने बीत जाने के बाद भी आयुक्त वैध भाड़े से दी गई गाडियां वापस लेने में समर्थ साबित हुए है। यही नही ठेकेदार का डर इतना है कि आरोग्य व स्वच्छता अधिकारी भी ठेकेदार पर कार्रवाई करने से कतरा रहे हैं। इस संबंध में आरोग्य व स्वच्छता विभाग प्रमुख अधिकारी से संपर्क किया तो उन्होंने अपनी प्रतिक्रिया देने से मना कर दिया है।
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