नियंत्रण अधिकारी के नियंत्रण में नहीं है अवैध इमारतों का बांधकाम

भिवंडी। भिवंडी मनपा क्षेत्र में लगातार अवैध मकान व इमारतों की संख्या में इजाफा हो रहा है। बिल्डर भू-माफिया सरकारी जमीनों सहित निजी जमीनों पर अतिक्रमण कर अवैध रूप से गगनचुंबी इमारतों का निर्माण कर रहे है। बेरोजगार हुए पालिका के कई पूर्व नगरसेवक अब बिल्डर अथवा संरक्षण की भूमिका निभाना शुरू कर दी है। भिवंडी शहर लगभग 25 किलोमीटर क्षेत्र में फैला है। पालिका प्रशासन सभी क्षेत्रों में कंट्रोल रखने के लिए पांच प्रभाग समितियों में शहर को विभाजित किया है। इन समितियों के शहर विकास विभाग पर नियंत्रण रखने के लिए पालिका मुख्यालय में एक नियंत्रण व सहायक नियंत्रण अधिकारी की नियुक्ति के आलावा एक भरारी पथक का गठन किया गया है लेकिन इस भरारी पथक व नियंत्रण अधिकारी के नियंत्रण में निर्माणाधीन अवैध इमारतों का नियंत्रण नहीं है। जिसके वजह से पालिका सीमा क्षेत्र में लगभग 150 अवैध इमारतें निर्माणाधीन अवस्था में है। जिसमें गगनचुम्बी इमारतों से लेकर पहाड़ी व स्लम बस्तियों में बन रहे मकानों का भी समावेश है। 

गौरतलब हो कि पालिका मुख्यालय के चौथे मंजिल पर शहर विकास विभाग प्रमुख व नियंत्रण अधिकारी का कार्यालय है। हालांकि शहर विकास विभाग प्रमुख का पद बिल्डिंग कम इंस्पेक्टर डिप्लोमा धारक कर्मचारियों के लिए है। किन्तु भिवंडी पालिका में इस पद पर बैठने के लिए लोग बाज़ार की भाव के तरह बोली लगाते रहे है। जिसके कारण चतुर्थ व तृतीय श्रेणी के कर्मचारियों का इस पद पर कब्जा रहा है। प्रभाग समिति एक से लेकर पांच के विभिन्न इलाकों में आज पांच से सात,आठ -आठ मंजिलें की इमारतें निर्माणाधीन है जो पूरी तरह से अवैध है।पालिका अधिकारियों के सांठगाठ से बनाई जा रही ऐसी इमारतों में घटिया सामग्री का इस्तेमाल होता  है। जिसके कारण बहुत कम ही समय ऐसी इमारतें जर्जर हो जाती है। परन्तु इस गोरखधंधे में पालिका अधिकारियों की मोटी कमाई होती रही है। अब बिल्डर व भू- माफिया सरकारी जमीन व पालिका के स्वामित्व वाले ज़मीनों पर कब्जा कर अवैध निर्माण शुरू किया है। समय रहते हुए अगर ऐसी इमारतों पर अंकुश नहीं लगा तो एक दिन पूरा शहर अवैध इमारतों के मकड़जाल में फंस जरूर नजर आऐगा।

रिपोर्टर

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