
राजनीतिक संरचना का एक अभिन्न हिस्सा है जातीय आधारित जनगणना का कानून
- कुमार चन्द्र भुषण तिवारी, ब्यूरो चीफ कैमूर
- May 03, 2025
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संवाददाता श्याम सुन्दर पांडेय की रिपोर्ट
दुर्गावती(कैमूर)-- देश में जितने भी कानून भारतीय संसद ने बनाए वह जनता के हित को लेकर नहीं केवल अपने राजनीतिक विरासत को बचाने के लिए ज्यादा ध्यान में रख कर बनाया गए। आज भारतीय संसद ने एक बार फिर उसी राह पर चल पड़ी है।यह जो जातीय जनगणना पर मुहर लगी है वह भी वोट प्राप्ति के लिए राजनीतिक संरचना का ही अभिन्न हिस्सा है। राजपूताना का शासन क्या था क्या से क्या हो गया उन लोगों ने सोचा होगा कि देश की आजादी के लिए देश की संरचना के लिए और सुरक्षा के लिए सब कुछ दे दिया जाए जिससे देश खुशहाल रहे जनता और अमन चैन की नींद ले सके लेकिन हुआ ठीक उल्टा। किला खत्म हुआ रियासत खत्म हुई जमींदारी खत्म हुई काश्तकारी खत्म हुई फिर मिला क्या बदले में थोपा गया आरक्षण एससी एसटी एक्ट बची खुची जमीन हथियाना के लिए वक्त बोर्ड। अब जातीय जनगणना कराके लड़ने की शक्ति को भी छीनने का सुनियोजित तरीके निकाले गए है जिससे सामाजिक, आर्थिक,राजनीतिक आध्यात्मिक क्षमता को छीना जा सके। जातीय जनगणना रूपी वृक्ष एक नया राजनीतिक भूमि को तैयार करेगी जिसमें मांग होगी जिसकी जितनी हिस्सेदारी उसकी उतनी भागीदारी। यही नहीं रुकेगी यह यात्रा जातीय संगठनों को भी बढ़ावा देगी जातिय राष्ट्र की मांग होगी जातिय नफरत बढ़ेगी। देश में आरक्षण की राजनीतिक विरासत के माध्यम से योग्यता की बलि चढ़ाई ही जा रही है,जाति आधारित कानून से तो नफरत बढ़ ही रहा है, इसी बीच यह जाति जन गणना रूपी पेड़ अपनी राजनीतिक विरासत को बचाने के लिए फिर लगा हि दिया गया देखें भविष्य में देश की राजनीति किस दिशा में जाती है।भारतीय जनमानस को समझ लेना चाहिए कि यह रास्ता आने वाले भविष्य का भूकंप साबित हो सकता है। लेकिन जिस तरह की राजनीति देश में आज हो रही है तुष्टिकरण की कल बल छल की,योग्य बच्चों को आरक्षण की आहुति चढ़ाने की, सवर्णों को एससी एसटी लगाकर धमकाने और दबाने की आने वाले भविष्य में जातीय जनगणना उसमें और एक अध्याय जोड़ेगा। देश के बाहर की जगह अंदर का सर्जिकल स्ट्राइक भारतीय राजनीति का मास्टर स्टोक है देखे इस मास्टर स्टोक का कौन दल लाभ प्राप्त करता है
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