कभी एशिया का गौरव रहा डालमियानगर आज गंदगी और बदबू से बेहाल, बाजार में सफाई के नाम पर सन्नाटा।


संवाददाता पारसनाथ दुबे


डेहरी-ऑन-सोन, रोहतास। एक समय था जब रोहतास उद्योग के नाम से पूरा एशिया डालमियानगर को जानता था। सीमेंट, पेपर, डालडा, फाइबर, अशोक साबुन, शुगर मिल और एस्बेस्टस जैसी इकाइयां एक ही चहारदीवारी के अंदर चलती थीं। कर्मचारियों के बच्चों के लिए बड़ा खेल मैदान, सब्जी मंडी, चावल मंडी और हर सामान से भरा मार्केट था। लेकिन आज वही मार्केट खंडहर में तब्दील हो चुका है।


बारिश के दिनों में मार्केट के चारों तरफ गंदा पानी और कचरे का अंबार लग जाता है। नालियों से उठती दुर्गंध इतनी तेज है कि लोगों का वहां से गुजरना मुश्किल हो गया है। जरूरत का सामान लेने के लिए भी लोगों को गंदगी के बीच से होकर जाना पड़ रहा है।


स्थानीय बुजुर्ग श्रीधर पांडे जी का कहना है कि "यहां सफाई की कोई व्यवस्था नहीं है। न डेहरी डालमियानगर नगर परिषद के सफाई कर्मचारी आते हैं और न कंपनी के। जबकि हम लोग दुकान का किराया कंपनी को देते हैं, फिर भी सफाई के नाम पर कुछ नहीं होता। गंदगी के कारण अब कोई ग्राहक भी सामान लेने नहीं आता।"


इतिहास के पन्नों में सिमट गया गौरव

1933 में रोहतास इंडस्ट्रीज लिमिटेड की नींव शुगर मिल से पड़ी थी। रामकृष्ण डालमिया ने इसे 3800 एकड़ में फैले औद्योगिक टाउनशिप में बदल दिया था। 1984 में वित्तीय घोटाले और श्रमिक आंदोलन के कारण कंपनी बंद हो गई और तब से यह इलाका वीरान पड़ा है।


सरकार द्वारा जमीन की नीलामी और नए औद्योगिक निवेश की बातें तो हो रही हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर बाजार की स्थिति जस की तस है। दुकानदारों और स्थानीय लोगों की मांग है कि नगर परिषद और संबंधित विभाग तुरंत सफाई व्यवस्था दुरुस्त करें, ताकि बीमारी फैलने से पहले ही इस ऐतिहासिक बाजार को बचाया जा सके।

रिपोर्टर

संबंधित पोस्ट