जिसकी वार्ड में सत्ता उसके ही सबसे ज्यादा अवैध बांधकाम ?

भिवंडी।। भिवंडी महानगर पालिका अब उल्लासनगर महानगर पालिका को पीछे छोड़ते हुए अवैध इमारतों की संख्या में आगे निकल चुका है.जिसका मुख्य कारण यहां के वार्डो में सत्ता स्थापित किये पुढारी नेताओं के आलावा दूसरा अन्य कोई नहीं है.इस प्रकार का आरोप मनपा प्रशासन द्वारा घोषित जर्जर इमारतों के कारण बेघर हुए लोगों ने को लगाया है.बतादें भिवंडी मनपा प्रशासन शहर में पटेल कंपाउंड स्थित जिलानी बिल्डिंग हादसे की पुनरावृत्ति रोकने के लिए 1243 जर्जर इमारतों को चिन्हित कर उनके पानी तथा बिजली कनेक्शन काट देने की मुहिम छोड़ रखी हुई है.जिसके कारण लाॅकडाउन तथा बरसात के समय भारी संख्या में लोग बेघर हो रहे है.जिसमें बूढ़े, बच्चे और गर्भवती महिलाओं का भी समावेश है.बेघर हुए परिवार नाते रिश्तेदार अथवा मित्रो के यहाँ घरों में आश्रय लेने के लिए मजबूर है।

मस्जिद, कबिस्तान की खाली पड़ी जमीन सहित ओपन स्पेस तथा डिपी रोड़ पर बन रही है अवैध इमारतें: 

शहर के पुढारी नेता और मनपा के सहायक आयुक्त का पद संभाल रहे क्लर्क दर्जे के कर्मचारियों से बिल्डर सांठगांठ कर कोव्हिड काल में लगे लाॅक डाउन के दरमियान शहर में लगभग 150 से 200 अवैध इमारतें बनकर तैयार कर ली है.अभी भी कई जगहों पर अवैध इमारतें निर्माणाधीन है.आश्चर्य की बात यह है कि बिल्डर तथा पुढारी नेताओं का आंतक इनता बढ़ गया है कि प्रभाग समिति क्रमांक 04,05 अंर्तगत खाली पड़े मस्जिद के जमीनो पर कब्जा कर अवैध रूप से इमारत का निर्माण कार्य शुरू कर दिया है अभी हाल में एक मस्जिद की खाली पड़ी जमीन पर अवैध निर्माण होने का विडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था.इसी तरह प्रभाग समिति क्रमांक एक अंर्तगत कुआं तथा डीपी रोड़ पर अवैध इमारतें बन रही है.प्रभाग समिति क्रमांक 02 अंर्तगत ओपन स्पेस के साथ साथ मनपा मुख्यालय से मात्र 100 मीटर दूर साई नगर, काप अली,बरफ गल्ली में बहुमंजिला इमारतें बनकर मनपा मुख्यालय के सामने सीना ताने खड़ी है.प्रभाग समिति क्रमांक 03 भी अछूता नहीं है यहां पर भी वन विभाग तथा सरकारी जमीन पर कब्जा कर अवैध रूप से इमारतें बनायी जा रही है

कोर्ट व मनपा आयुक्त को प्रभारी सहायक आयुक्त करते है गुमराह :

भिवंडी मनपा के आयुक्त डाॅ.पंकज आशिया ने अवैध इमारतों पर अंकुश लगाने के सभी प्रभारी सहायक आयुक्तो को दिशानिर्देश जारी किया है.इसके साथ ही अवैध इमारतों की सूची भी तलब किया है. मनपा के विशेष सुत्रों की माने तो प्रभारी सहायक आयुक्त उन अवैध इमारतों की सूची आयुक्त कार्यालय  भेजते है जिस पर डीपीएल फ्लो किया गया हो.अथवा पुढारी नेता के कारण उनके हाथों से मलाई खिसक गयी हों.जिस अवैध बांधकाम से उन्हें मलाई मिलती है उस बिल्डर के अवैध बांधकाम पर किसी प्रकार के कागजी कार्रवाई होने से बचाकर रखा जाता है.यही नहीं क्लर्क छाप सहायक आयुक्त बकायदे कोर्ट में सत्य प्रतिज्ञा पत्र देकर इमारत तोड़ देने का झूठा अहवाल भी जमा कर कोर्ट को भी गुमराह कर देते है।

आनन‌- फानन में बनी अवैध इमारतें धोखादायक:
मनपा के कार्यालयों में बैठे भ्रष्ट्र अधिकारियों सहित पुढारी नेता के संरक्षण में बनी अवैध इमारतें या अपने पद का रौब झाड़ते हुए अपने अपने क्षेत्रों में अवैध इमारतें बनवा रहे पुढारी नेताओं की इमारतें समय के पहले ही धोकादायक घोषित हो जाती है। आनन - फानन में बनी अवैध इमारतों में कम तथा घटिया सरिया सहित कम सीमेंट के  इस्तेमाल होता है.जिसके कारण कुछ ही वर्षों में इमारत के पीलर में दरारे आ जाती है.इसकी जानकारी मिलने पर मनपा प्रशासन उक्त इमारत को धोखादायक घोषित कर अपना पल्ला झाड़ लेती है.गैबीनगर, साईनगर तथा गौरीपाडा में अवैध रुप से बनायी गयी कई इमारतें के पीलर में दरारें आ गयी है.यही नहीं इसकी जानकारी होने के बाद भी लोग उसी इमारत में अपना परिवार लेकर रहते भी है.चालबाज बिल्डर भी इमारत के कालम में लोहे के पाईप अथा इंगल लगाकर गिरते इमारत को सहारा दे देते है.समय से पहले हुए जर्जर इमारतों के कारण भारी संख्या में ‌लोग बेघर होने के बाद क्या मनपा आयुक्त भ्रष्ट्र अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करेंगे इस प्रकार का प्रश्न दक्ष नागरिकों ने उठाया है।

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