
कानून को ताक पर रखकर चल रहे है भिवंडी में अबैध कोचिंग सेंटर ना है रजिस्ट्रेशन,ना ही सुरक्षा की व्यवस्था
- महेंद्र कुमार (गुडडू), ब्यूरो चीफ भिवंडी
- May 24, 2022
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सूरत कोचिंगकांड की हो सकती है पुनरावृत्ति
भिवंडी। भिवंडी में सैकड़ो की तादात में नियम कानून को ताक पर रखकर अबैध कोचिंग सेंटर चल रहे है।जिनका न तो कोई रजिस्ट्रेशन है न ही कोचिंग में पढ़ने आने वाले बच्चों की सेप्टी का कोई इंतजाम है।बावजूद क्लासेस वाले मुंहमांगी मनमाना फीस वसूल रहे है। जिनके कारण कुछ वर्ष पूर्व हुए सूरत कोचिंग कांड की कभी भी यहां पुनरावृत्ति हो सकती है।जिसे लेकर मनपा व जिला शिक्षण विभाग पूरी तरह उदासीन बना हुआ है। मालूम हो कि भिवंडी के धामनकर नाका, तीनबत्ती,मंडई, हाथी साइजिंग,कृष्णा काम्प्लेक्स सहित शहर के हर क्षेत्र में कई दर्जन से ज्यादा कोचिंग सेंटर इन दिनों चल रहे है।जिसमे से कई शिक्षक तो कई बेरोजगार कई कोचिंग चला रहे है।कई कोचिंग का तो मुंबई व ठाणे में भी कोचिंग की शाखाए है।इसके अलावा हर गली मोहल्ले व स्कूलो के पास कोचिंग सेंटर खुला है।सूत्र बताते है कि कोचिंग क्लासेस वाले बच्चों से हर माह पांच से आठ हजार के हिसाब से साल भर का 60 से 80 हजार फीस लेते है।शहर में चल रहे कोचिंग सेंटरों का आलम यह है कि वे मुंहमांगी फीस देने में देर होने पर कोचिंग सेंटर मालिक न सिर्फ बच्चों को बेइज्जत करते है बल्कि अभिभावकों से भी बदसलूकी करते है।जिन पर कार्यवाई को लेकर मनपा व जिला शिक्षण विभाग पूरी तरह उदासीन बना हुआ है। इन कोचिंग सेंटरों में बच्चों की न तो कोई सुरक्षा की व्यवस्था है न ही नियम कानून के तहत कोचिंग सेंटर चल रहे है।जानकारों का कहना है कि किसी भी कोचिंग सेंटर में यदि छात्रों की संख्या 15 से ज्यादा हो तो उस कोचिंग सेंटर को रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य होता है।साथ ही मनपा शिक्षण विभाग से इसकी इजाजत लेना जरूरी होता है।लेकिन भिवंडी में कोचिंग पर कोई कानून नही लागू होता है। साथ ही कोचिंग वालों के कारण बड़े पैमाने पर राजस्व को नुकसान हो रहा है।इस कारण सूरत कोचिंगकांड की यहां कभी भी पुनरावृत्ति हो सकती है। इधर मनपा के शिक्षण विभाग इस मामले को लेकर पूरी तरह उदासीन बना हुआ है।शायद यही कारण है कि क्लासेस मनपा के मापदंड पर खरा नही उतर रहे है।इस संदर्भ में बात करने के लिए मनपा उपायुक्त से जानकारी लेने के लिए कॉल करने पर उन्होंने कॉल रिसीव नही किया।वह उपायुक्त होकर भी शिक्षण विभाग की अनदेखी कर बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है।
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