डिजिटल निगरानी में धांधली 10 शिक्षकों पर कार्रवाई


रोहतास।ई-शिक्षा कोष ऐप, जिसे शिक्षा प्रणाली में पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से लागू किया गया था, अब खुद फर्जीवाड़े का शिकार बन चुका है। रोहतास जिले में इस ऐप के जरिए बिना विद्यालय गए उपस्थिति दर्ज करने के गंभीर आरोपों के बाद शिक्षा विभाग ने बड़ा कदम उठाया है। जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ)मदन राय ने संबंधित शिक्षकों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी देते हुए उनका वेतन तत्काल प्रभाव से रोक दिया है।

करगहर प्रखंड के 10 शिक्षकों के विरुद्ध प्रथम दृष्टया कार्रवाई शुरू की गई है। इनमें मध्य विद्यालय बसतलवा के संतोष कुमार सिंह, अकोढ़ी मध्य विद्यालय की खुशबू कुमारी और मयूरी गुप्ता, शाहमल खैरा के धनंजय पासवान, तोरनी के दिलीप कुमार, बकसड़ा के सनी राजवंता और बिशोडिहरी की प्रधानाध्यापिका मीना देवी जैसे नाम प्रमुख हैं। आरोप है कि ये सभी शिक्षक नियमित रूप से विद्यालय में उपस्थित हुए बिना ऐप पर अपनी उपस्थिति दर्ज कर रहे थे।

शिक्षा विभाग की जांच में यह साफ हुआ कि ये शिक्षक फर्जी हस्ताक्षरों के माध्यम से उपस्थिति दर्ज कर रहे थे। यह न केवल नियमन की अवहेलना है, बल्कि छात्रों के भविष्य के साथ भी खिलवाड़ है। शिक्षा विभाग ने इस रवैये को ‘नौकरी से विश्वासघात’ करार देते हुए कड़ी चेतावनी दी है।

प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी मनोज राम के अनुसार, सभी आरोपित शिक्षकों से मई 2025 की उपस्थिति रिपोर्ट के साथ स्पष्टीकरण मांगा गया है। जिला शिक्षा पदाधिकारी का साफ निर्देश है कि जो शिक्षक विभाग को गुमराह करते हुए कार्यहीन वेतन ले रहे हैं, उनके खिलाफ सेवा समाप्ति की कार्रवाई की जाएगी।


ई-शिक्षा ऐप को जिस भरोसे के साथ लागू किया गया था, वह अब सवालों के घेरे में है। यह घटना बताती है कि तकनीक चाहे कितनी भी उन्नत हो, जब तक नैतिकता और ज़िम्मेदारी न हो, पारदर्शिता केवल एक दिखावा बनकर रह जाती है। शिक्षा व्यवस्था को सुधारने की यह एक चेतावनी भी है—अब कार्रवाई नहीं, समाधान की ज़रूरत है।

रिपोर्टर

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