भिवंडी में नेताओं और तथाकथित पत्रकारों का रील-शाॅर्ट वीडियो का खेला, जनता परेशान

फेक न्युज की फैक्ट्री बनी भिवंडी,पुलिस कार्रवाई के बजाय कर रही आवभगत !


भिवंडी की राजनीति का नया चेहरा - मोबाइल कैमरे पर नेता - जमीन पर सन्नाटा


भिवंडी। शहर की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में इन दिनों एक अजीबोगरीब ट्रेंड जोर पकड़ चुका है। जिम्मेदार नेताओं से लेकर कुछ तथाकथित पत्रकार और अधिकारी तक यूट्यूब चैनलों और सोशल मीडिया पर रील, ब्लॉग और शॉर्ट वीडियो बनवाने में व्यस्त नजर आ रहे हैं। ये लोग जनता की असली समस्याओं से ध्यान हटाकर केवल कैमरे के सामने चमक बिखेरने में मशगूल हैं।

शहर की बदहाल सड़कों, गंदगी, ट्रैफिक जाम और बढ़ते अपराधों पर चर्चा करने के बजाय यह समूह सोशल मीडिया पर फेक न्यूज, सनसनीखेज वीडियो और दिखावटी प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर अपनी पहचान बनाने में लगा है। खास बात यह है कि इनकी आवाज़ चंद व्हाट्सऐप ग्रुपों से आगे नहीं बढ़ पाती, लेकिन इन छोटे-छोटे ग्रुपों में बवाल जरूर मचता है। कहीं किसी ढाबे पर बैठकर घंटों "लाइव कवरेज" की एक्टिंग होती है तो कहीं "एक्सक्लूसिव न्यूज" के नाम पर झूठी कहानियों की दुकान सजाई जाती है। शहर की आम जनता इस दिखावटी नेतागिरी और फर्जी पत्रकारिता से तंग आ चुकी है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जब भी कोई वास्तविक मुद्दा उठाना होता है, तब ये लोग चुप हो जाते हैं। लेकिन रील बनाने और फेक न्यूज फैलाने में ये सबसे आगे रहते हैं। और तो और, पुलिस प्रशासन पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। शहरवासी आरोप लगाते हैं कि कार्रवाई करने के बजाय प्रशासन ऐसे लोगों की आवभगत करता है, जिससे इनका हौसला और बढ़ रहा है। भिवंडी के हालात बताते हैं कि यह ट्रेंड केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि झूठी खबरें फैलाकर आम जनता को गुमराह करने का बड़ा हथियार बन चुका है। राजनीति में सस्ते प्रचार की भूख और पत्रकारिता के नाम पर बढ़ता धंधा शहर की साख को बुरी तरह चोट पहुंचा रहा है। शहर के दक्ष नागरिकों की माने तो "कब तक इस दिखावे और फरेब का खेल यूं ही चलता रहेगा? क्या प्रशासन जागकर इन "रील पत्रकारों" और "फेक नेता-गिरी" पर नकेल कसेगा या फिर भिवंडी का भविष्य सोशल मीडिया के शोरगुल में ही दबकर रह जाएगा ?"

रिपोर्टर

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