
मीडिया का दुरुपयोग करता फर्जी पत्रकार व बंटी बबली की टोली
- महेंद्र कुमार (गुडडू), ब्यूरो चीफ भिवंडी
- Mar 12, 2021
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लोहा पीटने, अंडा व दूध बेचने वाले शहर में करते हैं सोशल मीडिया की पत्रकारिता
भिवंडी।। पत्रकारिता के नाम पर पूरे देश में एक लचर व्यवस्था कायम हो गई है जिसका खामियाजा आम जनता के साथ शासन प्रशासन को भी अब भुगतना पड़ रहा है.वह यह निर्णय नहीं ले पा रहे है कि वास्तविक पत्रकारिता और दिखावटी पत्रकारिता में अंतर क्या है ?
शहर में यूट्यूब, सोशल साइटों पर खबर दिखाने का अधिकार आखिर किसने और कैसे दिया.बिना पैमाने के पत्रकारिता का बेड़ा गर्क करने में कुछ असामाजिक तत्व पिछले कई वर्षो से लगे हुए है जो फेसबुक, व्हाट्शाप और यूट्यूब पर ग्रुप बनाकर जनता और अधिकारियों पर धाक जमाते हुए असामाजिक कार्यों को बढ़ावा देते है।
वैसे भी प्रदेश के साथ साथ शहर में फर्जी पत्रकारों की बढती तादात ने पत्रकारिता छवि को धूमिल कर दिया है.इसमें हैरानी का विषय यह है कि अपने आप को स्वंयभू पत्रकार घोषित करने वाले पत्रकारों की शैक्षिणकता पर ही प्रश्रचिन्ह नही बल्कि इनकी कार्यशैली भी संदेह के घेरे में रहती है.यह स्थिती बडी गम्भीर है क्योकि आगामी भविष्य में इसके दूरगामी नकारत्मक परिणाम से मीडिया ग्रुप ही नही बल्कि प्रोफशनल पत्रकार भी अछूते नही रह पायेगे।
◾जनता और प्रशासनिक अधिकारियों को फर्जी पत्रकार करते हैं गुमराह :
वर्तमान स्थिती यह हो गई है कि नॉन-प्रोफशनल फर्जी पत्रकारों ने बकायदा टोली बनाकर, यही नहीं इस टोली में बंटी बबली जैसे लोग शामिल होकर शहर के मुख्य चौराहे सहित चाप टापरियों पर बकायदा प्लानिंग करते हुए देखे जाते है. इनके मायाजाल ने जनता और प्रशासनिक अधिकारियों को इस तरह से भ्रमित कर देते है कि वह सही और गलत का अनुमान ही नही लगा पाते है उन्हे इस बात का अदांजा भी नही लगता है कि वह इन फर्जी पत्रकारों के भम्रजाल में फसते जाते है।
बिना मापदंड के पत्रकारिता और अनुभवहीन यह पत्रकार अक्सर झुंड में चौराहे व नुक्कड़ो पर आसानी से देखे जा सकते है.यही नहीं दीपावली तथा स्थानीय निकाय चुनावों में बकायदा इस तरह के पत्रकारिता करने वाले फर्जी पत्रकार अपने स्वयं घोषित संस्थानों में कमीशन पर बेरोजगार युवाओं तथा युवतियों की नियुक्ति कर उनसे निकाय चुनावों में खड़े उम्मीदवारों को प्रचार के नाम पर बडी रकम डकार लेने का गोरख धंधा भी किया जाता रहा है.इसके साथ ही दीपावली तथा ईद के त्यौहार में इनकी संख्या और बढ़ जाती है. उत्सव व निकाय चुनाव बीतने पर ऐसे पत्रकार शहर के समस्याओं तथा पत्रकार परिषदों से नदारद रहते है ऐसे पत्रकारों मुखिया का सार्वजनिक मंच हों या फिर व्यक्तिगत कार्यक्रम अक्सर इनकी नकारत्मकता की छाप वहा आसानी से देखी भी जा सकती है. इसमें हास्यपद यह है कि इस तरह के फर्जी पत्रकार के वास्तिवक कार्य की बात की जाए तो यह नगण्य के समकक्ष है।
◾सोशल मीडिया का जमकर उठाया जा रहा है नाजायज फायदा:
सोशल मीडिय़ा और डिजिटल तकनीक का इनके द्वारा जमकर फायदा उठाया जा रहा है.साल भर में एक दो फर्जी विडियो न्युज पोस्ट कर इस माध्यम को इनके द्वारा बखूबी से इस्तेमाल किया जा रहा है.लोगों को भ्रमित कर सोशल मीडिया माध्यम से, यूट्यूब के जरिए असवैधानिक तौर पर माईक, आईडी इस्तेमाल कर, जो मायाजाल इनके द्वारा फैलाया जा रहा है.वह इलैक्ट्रोनिक मीडिया को भी शर्मशार कर रहा है.किसी भी परिस्थिति को वीडियो या फोटो से जोड़कर गलत तरीके से खबरों को चलाने धमकाने और उगाही में बढ़-चढ़कर इस तरह के स्वयंभू पत्रकार यूट्यूब, फेसबुक, व्हाट्सएप ग्रुपो का भी भारी मात्रा में दुरुपयोग कर रहे है.इसमें समझने वाली बात यह है कि इन फर्जी पत्रकारों ने अब प्रिंट मीडिया में भी सेंध लगा दी है। बकायदा इसके लिए आर.एन.आई (अखबार पंजीकरण संस्था भारत ) अखबार का पंजीकरण करवाकर अखबार के संपादक ,प्रधान संपादक और मालिक बन कर इनके द्वारा लोगों के समक्ष रौब गाठा जा रहा है.अखबार पंजीकरण प्रक्रिया की लचीली व्यवस्था का नतीजा है कि इस तरह के लोग भी अखबार पंजीकरण करवा रहे है।
कुछ समय पूर्व इस तरह के फर्जीवाडे के रोकथाम के लिए यह बात सामने आई थी कि उन्ही लोगों का अखबार का पंजीकरण किया जाए जिन्हे अखबार मेंं 5 वर्ष का अनुभव हो और साथ ही कम से कम शिक्षा का स्तर स्नातक या फिर उसके समकक्ष हो.पर कोई नियम ना होने के चलते अखबार के रजिस्ट्रेशन आसानी से यह फर्जी पत्रकार करवा रहे है।
◾गुमराह करने वाली कार्यशैली:
इनकी कार्यशैली हमेशा ही संशय के घेरे में रहती है क्योकि जनता और अधिकारियों को, जिस तरह से इन्होने भ्रमजाल में फंसाया हुआ है यह इसका फायदा उठाने से, कभी नही चूक रहे है.यहां तक की शहर में कोई भी इनसे अछूता नही है जिन्हे इन फर्जी पत्रकारों ने परेशान नही किया हो.अवैध कमाई का जरिया बना चुके पत्रकारिता को इनके द्वारा बदनाम किया जा रहा है.लोगों से अवैध वसूली कर रहे यह लोग पत्रकारिता के स्तर को निम्न करने में लगे हुए है.जिसका खामियाजा सही और प्रोफशनल पत्रकार भुगत रहे है.अब देखना यह है कि इस तरह के फर्जी पत्रकारों के जमावडे के रोकथाम के लिए प्रशासन क्या कर सकता है।
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