नब्बे के दशक में बना भिवंडी का विद्युत शवदाह गृह आज तक पड़ा है बंद

भिवंडी।। भिवंडी में कोरोना का कहर बरप रहा है.इस वैश्विक महामारी से आऐ दिन मौतें हो रही है शहर के गौरीपाडा, शिवाजी चौक, कामतघर और कणेरी आदि श्मशान भूमि में चिताऐ निरंतर जल रही है.इन क्षेत्रों में अब घनी बस्ती हो जाने के कारण श्मशान भूमि की राख व धुआँ नागरिकों के घरो तथा आंगन तक पहुँच रहा है.हिन्दू शवदाह गृह के पास बस्तियां बस गयी है जिसके कारण कभी भी अनहोनी होने से इनकार भी नहीं किया जा सकता है।.

90 के दशक में बना शिवाजी चौक के पास विद्युत शवदाह गृह उद्घाटन के बाद बंद:

भिवंडी के शिवाजी चौक, श्मशान भूमि में वर्ष 1990 में नगर पालिका प्रशासन ने विद्युत शवदाह गृह का निर्माण करवाया गया था.जिसमें करोड़ों रुपये खर्च हुआ था किन्तु खाड़ी के किनारे बनें विद्युत शवदाह गृह उदघाटन के बाद बंद पड़ा हुआ है.मरम्मत और जीर्णोद्धार के लिए एक दशक से अपना राह जोह रहा है.वर्ष 2005 में आयी बाढ़ के कारण खाड़ी का पानी इस विद्युत शवदाह गृह को डुबा दिया.जिसके उपरांत यह शवदाह गृह पूरी तरह से बंद पड़ा हुआ है।

लावारिस शव जलाकर किया गया था उदघाटन:
इस विद्युत शवदाह गृह के निर्माण कार्य में करोड़ों रुपए खर्च हुआ था तथा इसका उदघाटन भी लावारिस शव जलाकर तत्कालीन नगर पालिका प्रशासन ने किया था.किन्तु उदघाटन के बाद यह शवदाह गृह पूरी तरह से बंद पड़ा हुआ है.इसमें लगी इलेक्ट्रिक मशीनें पूरी तरह से खराब हो चुकी है.इसके पुनः निर्माण में न तो सरकार के तरफ से और न ही जिला प्रशासन और न ही महानगर पालिका प्रशासन की तरफ से कोई  पहल नहीं की गयी है.मनपा परिक्षेत्र में पड़ने के बावजूद महानगर पालिका प्रशासन ने अपनी कार्य योजना में इसे शामिल नहीं किया है.कई जागरूक नागरिकों का मानना है कि राज्य सरकार तथा जिला प्रशासन और मनपा प्रशासन के उदासीन रवैये के कारण यह विद्युत शवदाह गृह बदहाली का शिकार बना हुआ है।

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