15 दिनों से अधिक खांसी होने की स्थिति में अनिवार्य रूप से करायें बलगम की जांच : डॉ. नरेश

- एसीएफ के दौरान जिले के जांच के लिये चिन्हित किये गये 900 लोग, 346 लोगों की बलगम की हुई टेस्टिंग 

- टीबी उन्मूलन के लिए समुदाय पर जागरूकता अभियान चलाया जायेगा

बक्सर ।। जिले में ठंड का प्रकोप बढ़ने लगा है। मौसम विभाग की माने तो आगामी एक दो दिनों में न्यूनतम तपमान 11 डिग्री सेल्सियस से भी कम होने वाला है। ऐसे में लोगों को सर्दी व खांसी की चपेट में आना आम बात हो जायेगी। लेकिन, इन सबके बीच चिंता का विषय यह है कि लोग घरेलु इलाज या फिर बेफिक्री के चक्कर में आकर खांसी का इलाज नहीं कराते हैं। जो आगे जाकर टीबी का रूप भी ले सकती है। जो लोगों के लिये परेशानी का सबब बन सकती है। यदि ज्यादा दिनों तक खांसी को नजरअंदाज किया जाये, तो इसके परिणाम काफी भयावह हो सकते हैं। इसलिये 15 दिनों से अधिक खांसी रहने पर अनिवार्य रूप से बलगम की जांच करानी चाहिये। ताकि, टीबी के लक्षणों की पहचान कर उसका इलाज शुरू हो सके।

जिले में 56 नये टीबी के मरीज मिले :

जिला यक्ष्मा पदाधिकारी डॉ. नरेश कुमार ने बताया, यक्ष्मा रोग एक जटिल रोग है। इसे जल्द से जल्द पहचान कर इलाज शुरू किया जाना चाहिए, ताकि दूसरों व्यक्तियों में यह संक्रमित बीमारी न पहुंचे। बीते माह जिले में सघन रूप से एक्टीव केस फाइनडिंग अभियान चलाया गया था। जिसमें पूरे जिले से 900 लोगों को टीबी जांच के लिये चिन्हित किया गया था। उनसे 346 लोगों की जांच के बाद उनका बलगम लिया गया था। रिपोर्ट के अनुसार जिले में 56 नये टीबी के मरीज मिले थे। जो एक चिंतनीय है। उन्होंने बताया, सरकार 2025 तक पूरे भारत से टीबी को जड़ से मिटाने के लिये प्रतिबद्ध है। जिसमें आम लोगों के सहयोग भी आवश्यकता है। सरकार मरीजों को प्रोत्साहन राशि तो देती ही हैं, साथ ही निजी चिकित्सकों को मरीज के नोटिफिकेशन पर को 500 रु.  तथा आउटकम पर भी 500 रु.देने का प्रावधान है। राशि लक्ष्य के अनुरूप डॉक्टरों को भुगतान किया जाता है।

सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों दो सदस्यीय टीम होगा गठन :

डॉ. नरेश कुमार ने बताया, जिले में टीबी उन्मूलन के लिए समुदाय पर जागरूकता अभियान चलाया जायेगा। इसके लिये सभी प्रखंडों के चिकित्सा पदाधिकारियों को उन्मूलन कार्यक्रम की प्रखंडवार उपलब्धियों की समीक्षा कर एक्टिव केस फाइंडिंग एवं निक्षय पोषण राशि का भुगतान करने के लिए निर्देश दिया। सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में आशा एवं अन्य सामुदायिक उत्प्रेरक की 2 सदस्य घर-घर विजिट टीम का गठन कर प्रतिदिन कम से कम 50 घर का भ्रमण कर संभावित टीबी रोगियों की पहचान करने का निर्देश दिया एवं स्थानीय निकटतम बलगम जांच केंद्र अथवा ट्रू-नेट लैब में सैंपल की जांच करवायें। सभी पंजीकृत टीबी रोगियों का घर भ्रमण कर संपर्क में रहने वाले 5 वर्ष तक के बच्चों एवं वयस्कों में टीबी की स्क्रीनिंग करने का निर्देश दिया तथा योग्य बच्चों की लाइन लिस्टिंग कराई जायेगी।

रिपोर्टर

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