
भारतीय संविधान में सभी नागरिकों को न्याय पाने का मौलिक अधिकार- राधेश्याम शुक्ला
- रामजी गुप्ता, सहायक संपादक बिहार
- Nov 26, 2023
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संविधान प्रस्तावना शपथ पत्र आयोजित
विनोद कुमार राम की रिपोर्ट
भभुआ/ कैमूर ।। बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकार के निर्देशानुसार संविधान दिवस के अवसर पर व्यवहार न्यायालय भवन कैमूर भभुआ में प्रस्तावना मौलिक कर्तव्यों पर माननीय जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकार कैमूर राधेश्याम शुक्ला के द्वारा समय 10:15 पर वाचन किया। सर्वप्रथम जिला जज ने संविधान प्रस्तावना पर के तेल चित्र पर माल्यार्पण किया। जिला एवं सत्र न्यायाधीश कैमूर राधेश्याम शुक्ल ने कहा कि 26 जनवरी 1950 को भारतीय संविधान लागू हुआ,भारतीय संविधान संघात्मक,एकात्मक व्यवस्था का सुंदर मिश्रण है। इसमें संसदीय व्यवस्था एवं स्वतंत्र न्यायपालिका का प्रवधान किया गया है। समता का अधिकार भी प्रदान किया गया है। कानून का समान संरक्षण सभी लोगों को प्राप्त है। इसकी गारंटी भारतीय संविधान देता है। न्याय सबके लिए हो सुनिश्चित करने के लिए विधिक सेवा प्राधिकार के अधिनियम 1987 को अधिनियमित हुआ और इसको क्रियान्वित करने के लिए बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकार, राष्ट्रीय सेवा प्राधिकार न्याय सबको सुनिश्चित करने के लिए पूरी व्यवस्था प्रदान करता है। किसी भी निरोकता के नाते व्यक्ति न्याय से वंचित न हो इसका पूरा ध्यान रखा जाता है। और जिला विधिक सेवा प्राधिकार जिला कैमूर इस और आगे कदम बढ़ा चुका है और दृढ़ संकल्प है की कोई भी व्यक्ति किसी भी निरोगता के कारण चाहे आर्थिक हो या सामाजिक हो जैसे भी हो न्याय पाने के अधिकार से वंचित नहीं हो सकता। आज संविधान दिवस के अवसर पर हम लोग भारत के संविधान के प्रस्तावना का वाचन करेंगे। उपस्थित सभी सभी लोगों ने संविधान की प्रस्तावना का वाचन किया कि
हम भारत के लोग भारत को एक संपूर्ण प्रभुत्व संपन्न समाजवादी पंथ निरपेक्ष लोकतंत्रात्मक गणराज बनाने के लिए तथा उसके समस्त नागरिकों को सामाजिक आर्थिक और राजनैतिक न्याय विचार अभिव्यक्ति विश्वास धर्म और उपासना की स्वतंत्रता प्रतिष्ठा और अवसर की समता प्राप्त करने के लिए तथा उन सब में व्यक्ति की गरिमा और राष्ट्र की एकता और अखंडता सुनिश्चित करने वाली बंधुता बढ़ाने के लिए दृढ़संकल्प होकर अपनी इस विधानसभा में आज तारीख 26 नवंबर 1949 ई (मिति मार्गशीर्ष शुक्ल सप्तमी, संवत् दो हजार छह विक्रमी) को एतद्द्वारा इस संविधान को अंगीकृत अधिनियमित और आत्मार्पित करते हैं। इस अवसर पर प्रधान न्यायाधीश कैमूर भरत भूषण भशिन, अपर जिला एवं सत्र न्याय धीश प्रथम संतोष कुमार तिवारी, आशुतोष कुमार उपाध्याय, धर्मेंद्र तिवारी, श्रीमती नम्रता तिवारी, जिला विधिक सेवा प्राधिकार कैमूर के सचिव मो.एस.एम.अफजल, अनिल कुमार ठाकुर, सीजीएम क्षिप्राचला अंजली, सुनील कुमार, सुशील कुमार श्रीवास्तव, मनोज कुमार,मुंसफ सुभाष कुमार, शिखा पांडे, अंकित त्रिपाठी, अर्चना द्विवेदी, संदीप कुमार पांडे, जिला अधिवक्ता संघ के पूर्व संयुक्त सचिव मंटू पांडे, संघ के पूर्व अध्यक्ष रामेश्वर पाठक, पूर्व महासचिव ओम प्रकाश, तदर्थ कमेटी के जिला अध्यक्ष रविंद्र नाथ चौबे,उपाध्यक्ष प्रमोद कुमार तिवारी, परमहंस पांडे, अमित कुमार द्विवेदी, प्रेमचंद सिंह, सुशील कुमार, मुन्ना कुमार, विनीत तिवारी, मेराज आलम, गणेश कुमार, इमरान आदि लोगों में सभी न्यायिक पदाधिकारी गण, अधिवक्तागण, कर्मचारीगण लोगों ने संविधान प्रस्तावना में भाग लिया।
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