परीक्षा संबंधी बिषय पर उन्मुखीकरण


रोहतास ।जिला शिक्षा पदाधिकारी मदन राय की मौजूदगी में डायट, फजलगंज में परीक्षा सम्बंधी विषय पर एक दिवसीय संवेदीकरण-सह-उन्मुखीकण कार्यशाला आयोजित किया गया।

 कार्यशाला का उद्घाटन  जिला शिक्षा पदाधिकारी मदन राय सहित जिला कार्यक्रम पदाधिकारी रोहित रौशन, निशांत गुंजन, रविन्द्र कुमार, श्रीमति प्रियंका एंव  प्राचार्य डायट द्वारा संयुक्त रुप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। 

तत्पश्चात विद्यालय के विद्यार्थियों ने स्वागत गायन कार्यक्रम की शुरुआत किया गया।

जिसमें प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी , माध्यमिक विद्यालय से आये प्रधानाध्यापक तथा अभिभावक भी मौजूद रहे। कार्यशाला को सम्बोधित करते हुए जिला शिक्षा पदाधिकारी ने कहा कि राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) बच्चों के अधिकारों को बढ़ावा देने और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न संवेदीकरण उपाय अपनाता है। ये उपाय समाज के विभिन्न वर्गों, विशेष रूप से बच्चों, अभिभावकों, शिक्षकों, और प्रशासनिक अधिकारियों को बाल अधिकारों के प्रति जागरूक करने के लिए डिज़ाइन किए गए होते हैं। NCPCR "परीक्षा पर्व" जैसे अभियानों के माध्यम से बच्चों, अभिभावकों, और शिक्षकों को परीक्षा के तनाव, साइबर सुरक्षा, और नशे की रोकथाम जैसे विषयों पर कार्यशाला कर संवेदनशील बनाता है। इन अभियानों में सोशल मीडिया लाइव सत्र, प्रेरक वक्ता, और विशेषज्ञों के साथ बातचीत भी शामिल होती है।

कार्यशाला को सम्बोधित करते हुए जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (समग्र शिक्षा) रोहतास  श्री रोहित रौशन द्वारा कार्यशाला की सम्वेदनशीलता और इसके व्यवहारिक पहलू पर विस्तृत प्रकाश डाला गया। इनके द्वारा बताया गया कि राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग न केवल बच्चों के अधिकारों की रक्षा करता है, बल्कि समाज में एक ऐसी संस्कृति विकसित करने का प्रयास करता है जो बच्चों के प्रति संवेदनशील और जिम्मेदार हो। राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के प्रयास से इस तरह के अभियान को स्कूल स्तर पर लागू कर बच्चों को तनाव प्रबंधन और सकारात्मक व्यवहार के बारे में शिक्षित किया जा सकता है,ताकि हमारे बच्चे तनावमुक्त वातावरण में शिक्षा प्राप्ति के साथ-साथ तनावमुक्त वातावरण में परीक्षा दे सके।विद्यालय स्तर अभियान चलाकर बच्चों को तनाव प्रबंधन और सकारात्मक व्यवहार के बारे में शिक्षित किया जा सकता है।सुरक्षित/असुरक्षित स्पर्श: छोटे बच्चों को "गुड टच, बैड टच" की अवधारणा को कहानियों और चित्रों के माध्यम से समझाएँ जाने चाहिए बाल संसद एंव  मीना मंच  को स्कूलों में प्रोत्साहित कर संगठित एंव परभावी बनाया जाना चाहिए जहाँ वे अपनी समस्याएँ और विचार साझा करें, जिससे उनकी आवाज़ को महत्व मिले।

जिला कार्यक्रम पदाधिकारी, स्थापना श्री निशांत गुंजन ने अपने सम्बोधन में बताया की विद्यालय बच्चों में संवेदनशीलता, सहानुभूति, और जिम्मेदारी की भावना विकसित कर सकते हैं, इससे बच्चो को एक बेहतर नागरिक बनने में मदद मिलेगी। बच्चों को परीक्षा के तनाव से मुक्त करने के लिए विद्यालयों, शिक्षकों, अभिभावकों और स्वयं बच्चों के स्तर पर कई प्रभावी उपाय अपनाए जा सकते हैं। ये उपाय बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य को मजबूत करने, आत्मविश्वास बढ़ाने और तनाव को प्रबंधित करने में मदद मिलेगी। 

जिला कार्यक्रम पदाधिकारी एम.डी.एम. रविन्द्र कुमार ने अपन सम्बोधन के माध्यम बताया कि बच्चों को रचनात्मक शिक्षा,मित्रवत व्यवहार एंव बाल केन्द्रित शिक्षा से बच्चों को न केवल परीक्षा के तनाव से मुक्त किया जा सकता है, बल्कि उन्हें मानसिक और भावनात्मक रूप से भी मजबूत बनाया जा सकता 

जिला कार्यक्रम पदाधिकारी,माध्यमिक शिक्षा श्रीमती प्रियंका ने अपने जीवन अनुभव के आधार पर बताया कि प्रत्येक बच्चा अलग होता है; इसलिए, उनकी व्यक्तिगत जरूरतों और तनाव के स्तर को समझने की आवश्यकता होती हैतनाव के गंभीर लक्षण (जैसे नींद न आना, भूख में कमी, या आत्मविश्वास की कमी) दिखने पर तुरंत विशेषज्ञ की मदद लें। ऐसे में बच्चों को यह न लगे कि उनकी भावनाओं को नजरअंदाज किया जा रहा है; उनकी बात को गंभीरता से सुनने हेतु अपील किया गया।

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