देवर्षि नारद जयंती पर वक्ताओं ने समझाएं पत्रकारिता के मायने

मुख्य वक्ता के रूप में शामिल हुए प्रान्त संगठन मंत्री प्रज्ञा प्रवाह आहुजा एवं पाण्डेय


राजगढ़/ब्यावरा ।। आज के परिप्रेक्ष्य में नारद की भूमिका निभाने वाले पत्रकारों को समाज व राष्ट्र को पुष्ट करने के उपाय करने होंगें एवं देश को एक नई दिशा देने में अपना महत्वपूर्ण योगदान देना होगा। हमें सेन्सेशनल पत्रकारिता से बचना होगा और ऐसे समाचारों पर भी हम सभी को काम करना होगा जो सच तो है परंतु उनके प्रकाशन से समाज व संस्कृती को हानी हो सकती है। यह विचार भोपाल से ब्यावरा पधारे विशेष अतिथि के तौर डॉ नीरज पाण्डेय ने पत्रकारों से कहे, उन्होने कहा कि पत्रकारिता कोई संबैधानिक पोस्ट नहीं है फिर भी आपकी त्याग व समर्पण एवं सच्चाई को देखते हुए इसे चौथा खंबा का दर्जा प्राप्त है। वहीं कार्यक्रम के अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ पत्रकार श्याम चौरसिया ने कहा की नारदजी से समझा जा सकता है कि पत्रकारिता के मायने क्या थे। आज पत्रकारिता का स्तर देखकर दुख भी होता है हम सोशल मीडिया की तपेट में आ चुके है और जो परोसा जा रहा है उसे ही सच बढे चले जा रहे है। ऐसे में हमें अपना बोद्धिक स्तर बढाना जरूरी है जिससे समाज को एक नई दिशा दी जा सके। नारद जयंती के अवसर पर ब्यावरा पधारे प्रान्त संगठन मंत्री प्रज्ञा प्रवाह एवं पूर्व संयोजक जनसंपर्क विभाग लाजपत आहूजा ने एक संस्मरण के द्धारा पहले और आज की पत्रकारिता को समझाने को प्रयास किया और नारदजी की कार्यशैली को समझााने की कोशिश की। आहूजा ने कहा कि हिरण्यकश्यप ने जब अपनी गर्भवती पत्नि को घर से निर्वासित किया तो नारदजी से उन्हंे पहले शरण दी परंतु आज की पत्रकारिता में पहले  फोटो और वीडियों का चलन बढ गया है जिसके कारण कई अनचाही दुर्घटनाएं हो जाती है और हम समचार प्रकाशित करते है। इस भाव को भी समझना होगा। उन्होने पत्रकारों को समाचार के पूर्व शोध और रिसर्च की गुजाइश को सराहा और इसमें आंचलिक पत्रकारिता की प्रशंशा की ।

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