AC में बैठ कर अधिकारी मजदूरों को वापस व रोकने के लिए कर रहे हैं फरमान जारी

मजदूर भूख व पैसे नहीं होने के कारण कर रहे हैं पलायन

भिवंडी, ठाणे ।। मुंबई - नासिक महामार्ग पर मजदूरों का जत्था - जत्था पलायन देखने को मिल रहा हैं.वही पर पुलिस के डर से नाकाबंदी स्थानों पर मजदूर जंगल के रास्ते जाने के लिए मजबूर हैं. किसी भी कीमत से अपने अपने गांव जाना चाहते हैं.पैदल या साइकिल से ही 1500 से 2000 किलोमीटर तक सफर करने के लिए निकल जाने के लिए मजबूर हैं. मुंबई ,कल्याण, ठाणे , वसई विरार भिवंडी अन्य शहरों से हजारों मजदूर प्रतिदिन पलायन कर रहे है.इनमें छोटे छोटे बच्चों के साथ महिलाओं का भी समावेश होता हैं.इन मजदूरों से पूछने पर एक ही जबाब मिलता हैं कि यहाँ भूखे मरने से अच्छा अपने गांव में जाकर मरना सही हैं.इसलिए पैदल ही गांव जा रहे हैँ।                               

सरकारी दावा निकला खोखला

राज्य सरकार द्वारा इन मजदूरों को रोकने के लिए इन्हें दो टाइम भोजन देने के लिए कहा गया था.किन्तु इन्हे प्रतिदिन सिर्फ 150 ग्राम खिचड़ी ही वितरित की जा रही हैं.खिचड़ी लेने के लिए भी दो - दो घंटे कतार में खड़ा रहना पड़ता हैं. कुछ लोगों को अपने हिस्से में खिचड़ी तक नसीब नहीं होती.नबर आते आते सरकारी खिचड़ी भी समाप्त हो जाती हैं.जिसके कारण मजदूरों को पलायन के अलावा दूसरा विकल्प नहीं बचता हैं ।

AC में बैठकर अधिकारी कर रहे हैं फरमान जारी

बड़े अधिकारियों द्वारा, पलायन कर रहे मजदूरों को किसी भी तरह रोके रहने व पैदल जा रहे हाईवे से इन्हे वापस करने के लिए फरमान
जारी किया जा रहा हैं.किन्तु कोई भी इनका दर्द व दुःख सुनने के लिए तैयार नहीं हैं.कारखाने ,रोजगार, व्यापार ठप्प होने के कारण इनके सामने रहने व खाने की घोर समस्या पैदा हो गयी हैं. इन्हे रोजगार देेेेनेे वाले सेठिया इनका फोन उठाना जरुरी नहीं समझते हैं ।

मजदूर व मरीज में भेदभाव

पुलिस के डर से रात में ही मजदूर पलायन कर रहे हैं.पैदल ही हजारों किलोमीटर सफर तय करने वाले मजदूरों के बारे में सरकार क्यों सोंच नहीं रही हैं ? इसके बारे में कोई नेता अभिनेता सरकार से पूछने के लिए तैयार नहीं हैं.वही पर दूसरी तरफ कोरोना वायरस से पीड़ित मरीजों को बचाने के लिए सरकार लाखों रुपए खर्च कर रही हैं कोंरटाईन किये गये लोगो को अच्छी सुविधा प्रदान की गयी हैं.जो जिंदा, पैदल ही हजारों किलोमीटर सफर कर जाने के लिए मजबूर हैं इनके बारे में भी सरकार को सोचना चाहिए. इनके पसीने से देश की अर्थव्यवस्था चलती हैं आज इन्हे ही सड़कों पर पैदल मरने के लिए छोड़ दिया गया हैं क्या यही सरकार की नीति हैं। पलायन कर कुछ मजदूरों ने यहाँ तक आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार विदेशों में फंसे लोगों के हवाई जहाज भेजती हैं वही पर स्कूल में फंसे छात्राऔ के लिए बस भेजी जाती हैं किन्तु हमारे लिए किसी प्रकार की सुविधा क्यों नहीं प्रदान की गयी हैं ।

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