
पावरलूमधारक संघटना व समन्वय समिति महाराष्ट्र द्वारा एक दिवसीय धरना।
- महेंद्र कुमार (गुडडू), ब्यूरो चीफ भिवंडी
- Nov 26, 2018
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भिवंडी से महेंद्र कुमार की रिपोर्ट
भिवंडी।पावरलूम उद्योग में छाई भयंकर मंदी व व्याप्त विविध समस्याओं के समाधान के लिए पावरलूमधारक संघटना व समन्वय समिति महाराष्ट्र द्वारा एक दिवसीय धरना आंदोलन नियाज भाई चायवाला के नेतृत्व में भिवंडी प्रांत कार्यालय के सामने दिया गया। उक्त अवसर पर हालारी पावरलूम एसोसिएशन, भिवंडी डेवलपमेंट फ्रंट, भिवंडी पावरलूम ओनर्स एंड वीवर्स एसोसिएशन, नोबेल वेल्फेयर एंड एजुकेशन सोसायटी के पदाधिकारी व शरद राम शेजपाल, एडवोकेट यासीन मोमिन, रतिलाल सुमरिया, फाजिल अंसारी,तारिक फारुकी प्रदेश सचिव कांग्रेस कमेटी , धीरू भाई गलैय्या,भिवंडी सपा अध्यक्ष अरफात शेख, जावेद आजमी, डॉ नूरुद्दीन अंसारी, हनीफ रमजान,नगरसेवक मलिक मोमिन, चंदू भाई, तिरूपति श्रीपुर,अनस अंसारी, महबूब भाई, अकरम भाई सुपारीवाले, जाहिद मुख्तार शेख आदि उपस्थित थे। उक्त अवसर पर एक शिष्टमंडल ने प्रांताधिकारी के माध्यम से प्रधानमंत्री को ज्ञापन सौंपा है। इस ज्ञापन के माध्यम से मांग की गई है कि देश में 28 लाख पावरलूम संचालित हैं जिसमें से 12 लाख पावरलूम केवल महाराष्ट्र में संचालित हैं जिसमें लगभग 8 लाख पावरलूम भिवंडी में संचालित हैं , यह पावरलूम उद्योग घरेलू उद्योग तथा मजदूरों पर निर्भर है। पूर्व दो वर्षों से भयानक मंदी आने के कारण पावरलूम बंद हो रहे हैं जिससे प्रतिदिन बेरोजगारी बढ रही है। व्यवसायिक मंदी के कारण 70 प्रतिशत पावरलूम बंद हो चुके हैं, जिसकारण बेरोजगारी, कायदा व्यवस्था बाधित होते हुए चोरी डकैती, मारपीट जैसे आदि आपराधिक मामले बढ रहे हैं। पावरलूम चलाने वाले मालिक व मजदूर भुखभरी के शिकार हो रहे हैं। इस उद्योग से जुड़े अन्य धंधे जैसे वारपिन, आइजिंग, इलेक्ट्रिक वर्कर्स, होटल धारक, दुकानदार, हमाल, मजदूर के परिवार भी भुखभरी के शिकार हो रहे हैं। इसलिए दूसरे देशों के मुकाबले में हमारे देश में आयात होने वाले कपड़ों पर आयात शुल्क है इसलिए आयात शुल्क बढाया जाए, सूत का जो बाजार भाव है उसे एक महीने तक स्थिर रखा जाए जिसके सरकार उचित व कठोर कार्रवाई करे, सूत के बाजार में बहुत ज्यादा सट्टेबाजी व कालाबाजारी होती है जिसे तुरंत रोका जाए इसके लिए सरकार कठोर योजना बना कर लागू करे, हाथ करघा बहुत कम है (1 से 2 प्रतिशत) हॅक यार्न 40 प्रतिशत तक होती है उसे रद्द किया जाए, केंद्र सरकार कई साल पहले हेंडलूम पैकेज की घोषणा करके हाथ करघा बुनकरों के सभी कर्ज व ब्याज माफ किए हैं उसी तरह से पावरलूम को भी पैकेज दिया जाए इसके लिए केंद्र सरकार गंभीरता से लेते हुए उचित विचार करे, सादे पावरलूम को देश में बचाने के लिए व स्थानीय मार्केट में बने रहने के लिए पावरलूम द्वारा निर्मित कपडों को आरक्षित किया जाए जिस तरह से हाथ करघे पर आरक्षित है। पावरलूम जो हमारे देश में संचालित हैं उसके केंद्र व राज्य सरकार में एक अलग मंत्रालय कायम किया जाए जो कि चलने वाले पावरलूम को हर तरह की सुविधा व देखभाल करसके, जिस तरह से दूसरे उद्योगों के लिए वर्किंग केपीटल बहुत कम ब्याज दरों से दी जाती है उसी तरह से पावरलूम उद्योग को भी कर्ज बहुत कम ब्याज की दर से उपलब्ध कराया जाए, मिलने वाली कोई भी रकम पावरलूम मालिकों के खाते में सीधे जमा होने के लिए उचित व्यवस्था की जाए।
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