युटुबर नहीं रहे पत्रकार ! इलेक्शन कमिश्नर ने नकारा

◾स्वयं घोषित युटुबर पत्रकारों को नही जारी हुए मतदान दिन वाले पहचान पत्र।

◾शहर में धाक जमाने हेतु पहचान पत्र मिलने के लिये किया था आवेदन।

भिवंडी। भिवंडी लोकसभा सहित जिले के तमाम लोकसभा क्षेत्रों में मतदान केन्द्र व मतदान गिनती के दिन 100 मीटर के भीतर प्रवेश पाने व न्युज कवरेज करने के लिए ठाणे जिला इलेक्शन कमिश्नर द्वारा मान्यता प्राप्त अखबार व न्युज चैनल के पत्रकारों को पहचान पत्र जारी किये जाते है। इस बार भी इसी प्रक्रिया के तहत पत्रकारों ने पहचान पत्र मिलने के लिए जिला चुनाव अधिकारी के कार्यालय में आवेदन किया था। जिसमें कई स्वयं घोषित युटुबर पत्रकारों ने भी अपनी धाक जमाने के लिए आवेदन जमा कर दिया था । ऐसे लोगों का आवेदन जिला चुनाव अधिकारी ने रद्द कर दिया है और मान्यता प्राप्त अखबार,न्युज चैनल के पत्रकारों की यादी जाहिर कर पहचान पत्र जारी किया गया है। पहचान पाने के इच्छुक स्वयं घोषित युटुबर पत्रकारों में खलबली मची है। 

गौरतलब हो भिवंडी शहर में स्वयं घोषित पत्रकारों की संख्या दिनोंदिन बढ़ती जा रही है। जिन्हें अक्षरों का ज्ञान नहीं। वह भी आज प्रतिष्ठित पत्रकारों के बीच आकर खड़ा रहता है। स्वयं हस्ताक्षर युक्त पहचान पत्र का पट्टा लटका कर ऐसे लोग दिन भर पत्रकार होने का दावा कर फिरते रहते है। पुलिस प्रशासन इन लोगों पर कार्रवाई करने के बजाय इनकी ही आवभगत में जुटे रहते है। लोगों का मानना है नकली पहचान पत्र बनाने वाले अथवा अपने वाहनों पर प्रेस पत्रकार लिखकर धाक जमाने वाले लोगों पर आखिरकार पुलिस कब कार्रवाई करेंगी। 

गत दिनों एक युटुबर ने अपनी न्युज जैसे शाॅट विडियो की पट्टी वाले स्थान पर पत्रकारों की गरिमा खराब करने के लिए कुछ आपत्तिजनक व अश्लील शब्द टाइप कर वायरल किया था। यह विडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। पत्रकारों ने इसे संज्ञान में लेकर इस युटुबर से युटुब साइट से विडियो डिलीट करवाया। युटुबर ने बताया कि उसे पढ़ने लिखने का ज्ञान है। इससे पहले वह साइकिल से स्लम क्षेत्रों में चूरन की बिक्री करता था। इलेक्शन में एकाएक युटुब की साइट पर नंबर वन नामक न्युज चैनल खोल दिया। स्वयं घोषित पत्रकार बनने के बाद पत्रकार परिषद, सरकारी व गैर सरकारी कार्यक्रमों में अग्रिम पंक्ति में बैठना शुरू कर दिया। सुत्रों की माने तो कुछ युटुबर ने अपने फर्जी न्युज चैनल के नाम पर उद्योग आधार कार्ड बना लिया है। इसी के बल पर युटुब साइट पर न्युज चैनल खोलकर पत्रकार बने है‌‌। स्वयं घोषित पत्रकारों द्वारा संगठना गठन कर अली बाबा चालीस चोरों की तरह कार्यक्रमों में अपनी उपस्थिति दर्ज करवा रहे है आश्चर्य की बात यह है ऐसे संगठना का मुखिया भी गवार ही रहता है। किन्तु फांड, धोखाधड़ी और वाकपटूता में पीएचडी की डिग्री हासिल रहती है। इसी के बल पर पूरे शहर में अवैध वसूली कर रंगारंग कार्यक्रम आयोजित किया जाता है। 

हलांकि इलेक्शन कमिश्नर को ऐसे स्वयं घोषित पत्रकारों के आलावा डी ब्लाॅक अखबार के मालिकों व संपादकों पर भी  कार्रवाई करने की आवश्यकता है। ऐसे तमाम लोग है जिनका अखबार वर्षो से प्रकाशित नही हुआ अथवा आर एन आई रजिस्टर आर्फिस ने डी ब्लाॅक कर दिया है लेकिन उसी अखबार के टी सीं अथवा आर एन आई नंबर के आधार पर युटुब न्युज चैनल चला रहे है। ऐसे लोग भी शासन के अधिकारियों सहित इलेक्शन कमिश्नर को गुमराह कर पहचान पत्र जारी करवा लिये है। कई प्रतिष्ठित पत्रकारों ने इलेक्शन कमिश्नर से मांग करते हुए कहा की अभी भी समय है ऐसे लोगों के सभी दस्तावेज कार्यालय में जमा किये है। ऐसे लोगों की जांच कर कानून के तहत करवाई होनी चाहिए जिसके कारण प्रतिष्ठित पत्रकारों के गरिमा को मर्लिन होने से बचाया जा सके।

रिपोर्टर

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