नाकामी छिपाने के लिए अभय योजना में वसूला गया टैक्स का लेखा - जोखा सार्वजनिक नहीं‌ ?. टैक्स लगाने के लिए मांगी जाती है रिश्वत

भिवंडी।। भिवंडी पालिका प्रशासन द्वारा अभय योजना अंर्तगत बकायादारों को दी गई 100 प्रतिशत ब्याज माफी योजना में  वसूल किया गया टैक्स की रकम का लेखा जोखा सार्वजनिक नही होने से शहर में तमाम प्रकार के चर्चाओं का बाजार गरम है। कई जागरूक नागरिकों की माने तो अभय योजना के अंर्तगत  वसूली की रकम सार्वजनिक नहीं होने से बड़े भष्ट्राचार से इनकार नहीं किया जा सकता है, क्योंकि पूर्व में बड़े बकायादारों की संपत्तियों के लाखों रूपये टैक्स कंप्यूटर से उड़ा कर उन्हें फायदा पहचाया जा चुका है। वही पर पालिका अधिकारी अपनी नाकामी छिपाने के लिए ब्याज माफी में वसूली गई रकम के आंकाडे का लेखा जोखा जानबूझकर सार्वजनिक नहीं कर रहे है। गौरतलब हो कि भिवंडी पालिका के प्रशासक विजय कुमार म्हसाल के आदेशानुसार उपायुक्त कर दीपक झिंजाड ने दिसम्बर 2022 से अभय योजना की शुरुआत कर टैक्स धारकों को 100 प्रतिशत ब्याज माफी की सुविधा दी थी। इस योजना के प्रसार व प्रचार में पालिका प्रशासन ने लाखों रूपये खर्च किये और भारी भरकम कर्मचारियों की टीम तैयार कर बकायादारों की संपत्तियां सील व नीलामी करने, पानी व बिजली कनेक्शन खंडित करने का काम युद्ध स्तर पर शुरू किया गया। समय समय पर इस योजना की मुद्दत में वृद्धि कर बकाया टैक्स धारकों को फायदा पहुंचाया गया। हलाकि 31 मार्च को इस योजना की मुद्दत समाप्त हो चुकी थी परन्तु पालिका प्रशासन ने 5 अप्रेल तक बकाया टैक्स धारकों को 100 प्रतिशत ब्याज माफी देकर टैक्स वसूली करती रही। इस आर्थिक वर्ष में टैक्स धारकों से कितना टैक्स वसूल किया गया और कितना बकाया है। दस दिन बीत जाने के बाद भी पालिका के टैक्स विभाग ने सार्वजनिक नहीं किया है। सुत्रों की माने तो 5 अप्रेल से टैक्स विभाग का कंप्यूटर अनिश्चित काल के लिए बंद हो चुका है। कर्मचारियों का दावा है कि कंप्यूटर अपडेट का काम शुरू है। जब तक अपडेट का काम शुरू रहेगा तब तक ना तो कर दाताओ से टैक्स का वसूली किया जा सकता है और ना ही इससे दूसरे संबंधित कामकाज। प्रत्येक वर्ष कंप्यूटर अपडेट के दरमियान  संपत्तियों के लेखा - जोखा में बड़ी गड़बड़ी पायी जाती है। इस दौरान कई संपत्तियां का अस्तित्व भी मिट जाता है। जिसके कारण पिछले वर्ष की भांति नये वर्ष का बकाया, वसूल और बकाया का हिसाब में भारी कमियां दिखाई पड़ती है। हलाकि इस विषय पर शोध करने की आवश्यकता है। कई संपत्ति धारकों ने पालिका के कर मूल्यांकन व कर निर्धारण विभाग के अधिकारियों पर आरोप भी लगा चुके हैं कि संपत्तियां पर टैक्स लगाने के आवेदन जमा करने पर संपत्तियों पर टैंक्स लगाने के एवज में कर्मचारी 15 रूपये से लेकर 40 रूपये प्रति स्क्वायर फीट के हिसाब से पैसे की मांग करते है। पैसा नही देने पर उनकी फ़ाइलों पर अनाप शनाप शेरा मारकर जानबूझकर सालों तक फ़ाइले पेंडिंग रखी जाती है और रिश्वत देने पर उसी दिन अथवा दूसरे दिन संपत्तियों पर टैक्स लगा दिये जाते है। जिसके कारण नागरिकों द्वारा लगभग सैकड़ों इमारतें बिना टैक्स ही इस्तेमाल की जा रही है। ऐसी इमारतें में रहने वाले नागरिक भी बिना टैक्स भरे पालिका के सभी सुविधाएँ ले रहे है। आखिरकार पालिका के राजस्व उत्पन्न में बाध्या डालने वाले कर्मचारियों व अधिकारियों पर कब कार्रवाई की जायेगी। इस प्रकार का सवाल शहर के दक्ष नागरिकों द्वारा उठाया जा रहा है।

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