
भिवंडी में प्रतिबंधित प्लास्टिक का धंधा बेखौफ जारी
- महेंद्र कुमार (गुडडू), ब्यूरो चीफ भिवंडी
- Oct 09, 2024
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मनपा और ठेकेदार की मिलीभगत से कानून की उड़ रही धज्जियां
भिवंडी। राज्य में सिंगल-यूज प्लास्टिक पर प्रतिबंध लगा है। लेकिन भिवंडी शहर में इस प्रतिबंध का खुलेआम उल्लंघन हो रहा है। जबकि भिवंडी महानगरपालिका (मनपा) ने इसे रोकने व दंड वसूल करने के लिए निजी कंपनी को ठेका दिया हुआ है। प्रशासन और ठेकेदारों की मिलीभगत से यह धंधा फल-फूल रहा है और जनता और पर्यावरण को इसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है।
मनपा ने सिंगल-यूज प्लास्टिक पकड़ने व जुर्माना वसूली का ठेका उल्लासनगर की मे. रेयान इंटरप्राइजेस को सौंप रखा है। ठेका ऐसी शर्तों पर दिया गया है कि जुर्माने से मिलने वाली रकम का 60% हिस्सा मनपा के खजाने में और 40% ठेकेदार के खाते में जाता है। लेकिन यह व्यवस्था अब भ्रष्टाचार और लूट का नया तरीका बन चुका है। सूत्र बताते हैं कि शहर में धड़ल्ले से प्रतिबंधित प्लास्टिक का इस्तेमाल और बिक्री हो रही है और इसके पीछे पालिका अधिकारियों और ठेकेदार के कर्मचारियों की साठ-गांठ है।
मनपा के पांचों प्रभाग में मे.रेयान इंटरप्राइजेस कंपनी ने पांच-पांच कर्मचारी तैनात किए है जो कागजों पर प्लास्टिक पकड़ने का काम करते है। जबकि हकीकत यह है कि इन कर्मचारियों का असली काम जुर्माने की रकम से अपना हिस्सा निकालना और प्लास्टिक के व्यापारियों को संरक्षण देना है। यही वजह है कि प्लास्टिक का धंधा खुलेआम फल-फूल रहा है और कानून केवल कागजों तक सीमित रह गया है और सबसे बड़ी विडंबना यह है कि निजी ठेकेदार के आलावा प्रशासन ने एक अलग से टीम बनाई है। इस टीम की पूरी कार्रवाई का नेतृत्व भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों का सामना कर रहे सुदाम जाधव के हाथों में सौंपा गया है। जाधव पर पहले भी अवैध कामों में शामिल होने के आरोप लगे है लेकिन फिर भी उन्हें यह जिम्मेदारी सौंपना मनपा की नीयत पर सवाल खड़े करता है।
सूत्रों के अनुसार, हाल ही में एक घटना सामने आई जिसमें मनपा कर्मचारियों और ठेकेदार के बीच जुर्माना वसूलने को लेकर गंभीर विवाद हुआ। यह साफ दर्शाता है कि इस पूरे सिस्टम में कानून की कोई इज्जत नहीं बची है और यह केवल एक पैसा कमाने की मशीन बन चुका है। शहर में खुलेआम बिक रही प्रतिबंधित प्लास्टिक थैलियां इस बात का सबूत हैं कि कानून की परवाह किसी को नहीं है। मनपा और ठेकेदारों के बीच गहरे संबंधों ने प्लास्टिक पर लगाए गए प्रतिबंध को एक मजाक बना दिया है आखिर सवाल यह उठता है कि जब कानून को लागू करने वाले ही इस तरह की मिलीभगत में शामिल हों, तो आम नागरिकों से कानून का पालन करने की उम्मीद कैसे की जा सकती है ? यह भ्रष्ट व्यवस्था न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रही है बल्कि यह दर्शाती है कि जनता की सुरक्षा और स्वास्थ्य के मुद्दे पर भी जिम्मेदार अधिकारी और ठेकेदार खेल खेल रहे है।
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