होली का त्यौहार हरा-भरा और पर्यावरण अनुकूल मनाने की अपील -- आयुक्त अजय वैद्य

भिवंडी।। महाराष्ट्र राज्य के साथ-साथ भिवंडी शहर में 24 मार्च को होली और धूलिवंदन 25 मार्च को मनाई जाने वाली है। पानी और रंग छिड़क कर यह त्यौहार मनाया जाता है। उत्सव प्रेमी इस त्यौहार में बदलाव कर प्लास्टिक की थैलियों में पेंट और पानी भरकर एक-दूसरे को मारकर जश्न मनाते है। यह प्लास्टिक बम कई बार हानिकारक और खतरनाक होते है। पर्यावरण की रक्षा के लिए और विवाद से बचने के लिए प्लास्टिक बम के इस्तेमाल से बचना ही बेहतर है। साथ ही होली के ये प्लास्टिक बम नागरिकों के शारीरिक को नुकसान पहुंचाते है,जानवरों पर रंग नहीं फेंकते, उन्हें डराते नहीं। साथ ही प्लास्टिक कचरे के कारण शहर की सुंदरता पर भी असर पड़ रहा है। डामर वाली सड़क पर यही प्लास्टिक तेजी से पिघलकर चिपक जाती है और आसानी से नहीं निकलती।

सरकार ने महत्वपूर्ण प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 के तहत कई वर्षों से प्लास्टिक प्रतिबंध नियम लागू किया है।जिन्हें पूरी तरह से नजरअंदाज किया गया है। सरकार द्वारा बताए गए नियमों के मुताबिक 50 माइक्रोन से कम मोटाई वाले प्लास्टिक बैग का इस्तेमाल प्रतिबंधित है।हालांकि शहर के बाजार में होली के लिए प्लास्टिक बैग और केमिकल रंगों की बिक्री जोरों पर है लेकिन नागरिकों को प्लास्टिक बैग और रासायनिक रंग नहीं खरीदने चाहिए। पर्यावरण की रक्षा के लिए प्लास्टिक का उपयोग कम करना जरूरी है। पर्यावरणविदों की मांग है कि शहर में प्लास्टिक बैग बेचने वालों और उपयोग करने वालों के खिलाफ महानगर पालिका द्वारा सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। पालिका आयुक्त अजय वैद्य ने नागरिकों से आने वाले होली के त्योहार में पर्यावरण पूरक प्राकृतिक रंगों के साथ जश्न मनाने की अपील की है। इसके साथ साथ उन्होंने कहा कि होली में प्लास्टिक की थैलियों का उपयोग न करें और न ही रासायनिक रंगों का उपयोग करें। कायदा का उल्लंघन करने पर पर्यावरण अधिनियम 1976 के प्रावधानों के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। आयुक्त वैद्य ने नागरिकों को होली की शुभकामनाएं भी दी है।

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