भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरे सुदाम जाधव की बहाली पर उठे सवाल

भिवंडी। भिवंडी-निजामपुर शहर महानगर पालिका में भ्रष्टाचार की जड़ें इतनी गहरी हो चुकी हैं कि भ्रष्ट अधिकारियों को ऊंचे पद दिए जा रहे है। प्रशासक राज में भ्रष्टाचारियों की तरक्की का खेल जोर-शोर से चल रहा है। टेंडर, कर्मचारियों की बदली,अवैध बिल्डिंगों से वसूली और अन्य अवैध गतिविधियों के लिए बकायदा कर्मचारियों की नियुक्ति की जा रही है। इसी क्रम में चर्चा में आए सुदाम जाधव, जो कि जीलानी बिल्डिंग हादसे व रिश्वत कांड के मुख्य आरोपी है। उन्हें पालिका प्रशासन ने दोबारा बहाल कर दिया है।

जीलानी बिल्डिंग हादसे का मुख्य आरोपी :

वर्ष 2020 में पटेल कंपाउंड स्थित जीलानी बिल्डिंग के हादसे में सुदाम जाधव को मुख्य आरोपी बनाया गया था। उन पर गैर-इरादतन हत्या सहित कई अन्य गंभीर धाराओं के तहत केस दर्ज है और फिलहाल वे कोर्ट से जमानत पर रिहा हैं। जाधव पर आरोप है कि उन्होंने अवैध निर्माणों की सुरक्षा के मानकों की अनदेखी की थी जिसके कारण इतना बड़ा हादसा हुआ था।  इस हादसे में 38 लोगों की जान गाई और 25 लोग घायल हुए थे। जिसमें कई नाबालिग व दूध पीते बच्चे भी शामिल थे।

रिश्वत कांड में फंसे जाधव :

सुदाम जाधव का नाम रिश्वतखोरी में भी सामने आ चुका है। 3 फरवरी 2024 को उन्हें नवी मुंबई के एंटी करप्शन ब्यूरो ने एक सामाजिक कार्यकर्ता से संपत्ति पर टैक्स लगाने के एवज में डेढ़ लाख रुपये की रिश्वत लेने के जुर्म में गिरफ्तार किया था। इस मामले में भी वे जमानत पर है। 

फर्जी डिग्री का विवाद :

सूत्रों के अनुसार सुदाम जाधव की शैक्षणिक डिग्री को लेकर भी विवाद चल रहा है। कई शिकायतकर्ताओं ने उनकी डिग्री को फर्जी बताते हुए शिकायतें दर्ज कराई हैं। बावजूद इसके, जाधव को नगर पालिका की सेवा में पुनः बहाल कर दिया गया है, जो कई सवाल खड़े करता है।

नगर पालिका प्रशासन में प्रभावशाली भूमिका :

जाधव पर आरोप है कि वे न केवल अवैध निर्माणों और वसूली से जुड़े मामलों में शामिल है बल्कि नगर पालिका में भर्ती और बदली प्रक्रिया में भी उनका प्रमुख दखल है। सूत्रों की मानें तो बिना जाधव की अनुमति के नगर पालिका में कोई कार्रवाई नहीं होती, चाहे वह अवैध निर्माण से संबंधित हो या प्रदूषण नियंत्रण से। 

बहाली पर उठे सवाल :

हालांकि नगर पालिका प्रशासन ने सुदाम जाधव को ‘अकार्यकारी एवं जनसंपर्क से दूर’ पद पर बहाल करने का आदेश दिया है। लेकिन यह सिर्फ कागजी खानापूर्ति लगती है। वास्तव में, सुदाम जाधव शहर विकास विभाग, प्रदूषण नियंत्रण विभाग और अवैध निर्माण मामलों से जुड़े अपीलीय अधिकारी के पद पर काबिज है। सुदाम जाधव के खिलाफ लगे गंभीर आरोपों के बावजूद उनकी बहाली और नगर पालिका प्रशासन में उनकी बढ़ती ताकत पर शहर में कड़ी आलोचना हो रही है। सुत्रों की माने तो पालिका के कई कर्मचारी इनके रवैये काफी नाराज़ है। 

मनसे व राकांपा के पदाधिकारी भी इनकी बहाली पर उठाऐ सवाल :

सुदाम जाधव की पुनः बहाली को लेकर मनसे ने पालिका मुख्यालय के समाने एक दिवसीय धरना कर चुकी है। वही राकांपा (शरद पवार गट) के पदाधिकारियों ने नगर विकास विभाग सहित मुख्यमंत्री कार्यालय में शिकायत दर्ज कराया है और इनकी पुनः बहाली पर सवाल खड़े किये है।

रिपोर्टर

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