
भिवंडी में अवैध निर्माणों की बाढ़, महानगर पालिका के अधिकारी मौन !
- महेंद्र कुमार (गुडडू), ब्यूरो चीफ भिवंडी
- Aug 06, 2025
- 403 views
बीट निरीक्षक और सहायक आयुक्त पर आरोप – अवैध इमारतों को मिल रहा संरक्षण
भिवंडी । शहर में अवैध निर्माणों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। मनपा क्षेत्र के पाँचों प्रभाग समितियों में इस वक्त लगभग 150 अवैध मकान व इमारतों का निर्माण कार्य धड़ल्ले से जारी है। हैरानी की बात यह है कि नगर निगम आयुक्त के आदेशों को दरकिनार करते हुए ज़िम्मेदार अधिकारी जेब भरने की फिराक में मस्त दिखाई दे रहे हैं। शहर विकास विभाग में एक कड़े और ईमानदार अधिकारी की तैनाती न होने के चलते, न तो अतिक्रमण हटाया जा रहा है और न ही नए अवैध निर्माणों पर अंकुश लग पा रहा है।सूत्रों की मानें तो सभी पांच प्रभाग क्षेत्रों में निर्माणाधीन इन 150 इमारतों को स्थानीय बीट निरीक्षक और संबंधित सहायक आयुक्त का संरक्षण प्राप्त है।
"रिचार्ज" सिस्टम पर चल रही है कार्रवाई ! ::::
पालिका के एक सेवानिवृत्त क्षेत्र लिपिक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि,"जब कोई अवैध निर्माण शुरू होता है, तो उसकी जानकारी हम शहर विकाश विभाग को लिखित रूप में दे देते हैं। मगर बीट निरीक्षक और सहायक आयुक्त, बिल्डर और भूमाफियों से मिलकर पूरे निर्माण को नजरअंदाज करते हैं और अंत में डीपीएल पूरा कर केवल खानापूर्ति की जाती है।"इतना ही नहीं, एक मौजूदा सहायक आयुक्त का चौंकाने वाला बयान सामने आया है —"हम हर महीने 'रिचार्ज' करते हैं, क्या वो रकम हम घर बेचकर लाएं?"
आयुक्त के आदेश हवा में, सवालों के घेरे में पालिका की कार्रवाई :::
वर्ष 2022 के बाद भिवंडी में 291 अवैध इमारतों के निर्माण की पुष्टि खुद आयुक्त एवं प्रशासक अनमोल सागर (भा.प्र.से.) ने की थी। उसके बाद उन्होंने अवैध निर्माणों पर रोक लगाने के लिए प्रत्येक प्रभाग समिति में दो-दो बीट निरीक्षक नियुक्त किए है। लेकिन ताज़ा हालात बताते हैं कि यह उपाय नाकाफी साबित हो रहा है। सिर्फ प्रभाग क्रमांक एक में ही पोगांव, चविद्रा, नागांव, गुलजार नगर, अंसार नगर, रामनगर, नूरी नगर, गायत्री नगर जैसे इलाकों में 60-70 अवैध इमारतें व गोदामों का निर्माण खुलेआम चल रहा है।
नेताओं की सरपरस्ती में चल रहे कई निर्माण ! ::::
स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, कई निर्माण स्थानीय नेताओं के संरक्षण में हैं, जिसके कारण पालिका के जिम्मेदार अधिकारी जानबूझकर कार्रवाई से बच रहे हैं।
शहरवासियों का कहना है कि आयुक्त के आदेश केवल कागजों तक सीमित रह गए हैं। भिवंडी जैसे घनी आबादी वाले शहर में इतनी बड़ी संख्या में हो रहे अवैध निर्माण न केवल कानून का मजाक उड़ा रहे हैं, बल्कि भविष्य में भारी जनहानि की आशंका भी बढ़ा रहे हैं।अब सवाल यह उठता है कि — क्या पालिका प्रशासन आंख मूंदकर सिर्फ "रिचार्ज" पर काम करता रहेगा, या वाकई कोई सख्त कार्रवाई होगी ?
रिपोर्टर