भिवंडी में "अंगुली राज" शुरू ! भाजपा -सपा विधायक प्रशासन से भिड़े

जनता बोली - क्या अब लोकतंत्र नही "धमकी तंत्र" चलेगा


दोनों विधायकों की कार्यशैली पर उठा सवाल सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल


भिवंडी। भिवंडी में हाल ही में दो विधायकों के व्यवहार को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। अलग-अलग मौकों पर भाजपा विधायक महेश चौघुले और समाजवादी पार्टी के विधायक रईस शेख का प्रशासनिक अधिकारियों से बातचीत का तरीका कैमरे में कैद हुआ, जो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इन वीडियो के सार्वजनिक होते ही आम नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने इस प्रकार की शैली पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं।

पहली घटना में भाजपा विधायक महेश चौघुले ने एक निर्माण कार्य के ठेकेदार को काम में लापरवाही को लेकर कड़े शब्दों में फटकार लगाई। जहां पर भिवंडी पालिका के आयुक्त व प्रशासक अनमोल सागर (भा.प्र.से.) स्वयं मौजूद दिखाई दिये। यह पूरी घटना कैमरे में रिकॉर्ड हुई और सोशल मीडिया पर वायरल होने लगी। विधायक का कहना है कि जनता के हित में गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध कार्य होना चाहिए, इसलिए उन्होंने ठेकेदार को चेतावनी दी।

दूसरी ओर, कुछ ही दिनों बाद समाजवादी पार्टी के विधायक रईस शेख पाइप‌ लाइन रोड़ के दौरे का वीडियो वायरल हुआ, जिसमें वे प्रभाग समिति क्रमांक-2 के अंतर्गत कार्यरत बीट निरीक्षक को सार्वजनिक रूप से आक्रोशित अंदाज में बात करते हुए देखे गए। इस दरमियान पालिका प्रशासन के मुख्य शहर अभियंता जमील पटेल के आलावा कई आला अधिकारी मौजूद थे। इस घटना पर भी तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

सोशल मीडिया पर वायरल हुए इन दोनों वीडियो को लेकर जनता के बीच दो राय बनती दिख रही हैं। कुछ लोगों ने विधायकों की कड़ी प्रतिक्रिया को "जवाबदेही तय करने का प्रयास" बताया, वहीं अन्य लोगों ने इसे "प्रशासन पर अनावश्यक दबाव बनाने" वाला व्यवहार कहा है। अब लोग कह रहे हैं - भिवंडी में प्रशासन नही, विधायकों की "अंगुली" चलती है। किसी ने कहा " नेता अब जनता के लिए नही, कैमरे के लिए गुस्सा दिखा रहे हैं। " तो किसी ने तंज कसते हुए कहा कि - भिवंडी में अब " फिंगर पाॅइंटिंग पाॅलिटिक्स " का दौर चल रहा है। 

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जनप्रतिनिधियों को अपने पद की गरिमा बनाए रखते हुए संवाद करना चाहिए। लोकतांत्रिक व्यवस्था में अधिकारियों से सवाल करना विधायकों का अधिकार है, लेकिन उसका तरीका संयमित और सम्मानजनक होना चाहिए। इन दोनों घटनाओं को लेकर स्थानीय राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हैं। अब देखना यह है कि आने वाले समय में जनता का भरोसा विधायकों की कार्यशैली पर कितना कायम रह पाता है।

रिपोर्टर

संबंधित पोस्ट